नेपाल में भीषण बाढ़ से 46 मौतें, 105 भारतीय लापता, PM मोदी ने बालेन शाह को मदद का भरोसा दिया

नेपाल और चीन सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। रसुवा और भोटेकोशी क्षेत्र में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। संकट की इस घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल को हर संभव राहत और मानवीय सहायता का भरोसा दिया है।
46 लोगों की मौत, सैकड़ों लापता
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से अब तक 46 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। करीब 300 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें कम से कम 105 भारतीय बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 90 से ज्यादा नेपाली नागरिक भी लापता हैं। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार अभियान चला रही हैं।
PM मोदी ने बालेन शाह से की बात
तबाही के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने बाढ़ में हुई जनहानि पर संवेदना जताई और नेपाल को हर संभव मानवीय तथा राहत सहायता देने का भरोसा दिया।
भारत की ओर से राहत सामग्री जल्द नेपाल भेजने की तैयारी की जा रही है। दोनों देशों की एजेंसियां बचाव और राहत अभियान में समन्वय कर रही हैं।

C-17 और C-130J से पहुंचेगी मदद
भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर एनडीआरएफ जवानों, राहत सामग्री और आधुनिक बचाव उपकरणों के साथ हिंडन एयरबेस से काठमांडू के लिए रवाना होने की तैयारी में है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों तक सामग्री पहुंचाई जाएगी।
वहीं, C-130J हरक्यूलिस के जरिए भी राहत सामग्री और दवाइयां भेजने की तैयारी है। भारतीय सेना की पैरामेडिकल टीम को भी जरूरत पड़ने पर नेपाल भेजने के लिए तैयार रखा गया है।
SSB की 18 टीमें अलर्ट
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत-नेपाल सीमा पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए 18 टीमें तैनात की हैं। करीब 1,751 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूद इकाइयों को भी अलर्ट किया गया है।
इसका उद्देश्य सीमा क्षेत्र में फंसे लोगों की मदद के साथ किसी भी आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देना है।
भोटेकोशी क्षेत्र में भारी तबाही
बाढ़ का सबसे ज्यादा असर भोटेकोशी नदी के किनारे बसे इलाकों में बताया जा रहा है। उत्तरी रसुवा में नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के चार जवान भी लापता हैं। कई वाहन और इमारतें बाढ़ के तेज बहाव में बह गईं।
नेपाल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के अनुसार, छह बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट और ट्रांसमिशन लाइनों को नुकसान पहुंचा है। कई हाईवे भी बंद हो गए हैं, जिससे राहत दलों के सामने प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने की चुनौती बढ़ गई है।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की त्वरित प्रतिक्रिया दोनों देशों के करीबी संबंधों को दर्शाती है। राहत सामग्री, बचाव उपकरण और संभावित मेडिकल सहायता के साथ भारत अब नेपाल के राहत अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी में है। फिलहाल प्राथमिकता फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है।