
उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रामपुर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने सपा-कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की बात कही, लेकिन संयुक्त प्रेसवार्ता में पार्टी के स्थानीय धड़ों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। इससे आजम खां और नदवी के बीच पुरानी राजनीतिक खींचतान फिर चर्चा में आ गई।
नदवी ने किया सपा-कांग्रेस गठबंधन का ऐलान
रविवार को रामपुर के तोपखाना रोड स्थित सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के कैंप कार्यालय पर सपा और कांग्रेस नेताओं की संयुक्त प्रेसवार्ता हुई। नदवी ने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस मिलकर लड़ेंगे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमिल शर्मा निक्कू पंडित ने भी गठबंधन के तहत चुनाव लड़ने और पार्टी के लिए सीटें मांगने की बात कही।
प्रत्याशी चयन पर नदवी का बड़ा बयान
टिकट वितरण को लेकर पूछे गए सवाल पर नदवी ने कहा कि चुनाव जीतने की स्थिति में जो उम्मीदवार सक्षम होंगे, उन्हें टिकट दिया जाना चाहिए, चाहे वह सपा से हों या कांग्रेस से। आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा की ओर से 15 सीटों की मांग से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। वहीं रामपुर की राजनीतिक लीडरशिप तय करने को लेकर उन्होंने कहा कि अब बंद कमरों में फैसले करने का दौर नहीं है और अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।
प्रेसवार्ता में स्थानीय गुटों की गैरमौजूदगी बनी चर्चा
संयुक्त प्रेसवार्ता में सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर और आजम खां के करीबी माने जाने वाले स्थानीय नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रामपुर में सपा के भीतर नदवी और आजम खां से जुड़े धड़ों के बीच मतभेद पहले से चर्चा में रहे हैं। हाल की रिपोर्टों में भी दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी का उल्लेख हुआ है।

2024 में टिकट को लेकर शुरू हुआ था विवाद
रामपुर में नदवी और आजम खां खेमे के बीच मतभेद की जड़ 2024 के लोकसभा चुनाव के टिकट से जुड़ी है। सपा ने आजम खां की पसंद के विपरीत मोहिबुल्लाह नदवी को रामपुर से प्रत्याशी बनाया था। आजम समर्थक आसिम राजा ने भी नामांकन दाखिल किया था, हालांकि पार्टी का अधिकृत प्राधिकार पत्र नहीं होने के कारण उनका नामांकन खारिज हो गया। इसके बाद भी दोनों धड़ों के बीच दूरी की खबरें सामने आती रही हैं।
मुस्लिम राजनीतिक हिस्सेदारी पर भी जोर
प्रेसवार्ता के दौरान नदवी ने आगामी चुनाव में मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद जताई। वहीं जब उनसे चुनाव के दौरान ‘अब्दुल’ शब्द को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी समुदाय का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए। उनका यह बयान भी प्रेसवार्ता के बाद चर्चा में रहा।
रामपुर में सपा के सामने एकजुटता की चुनौती
नदवी ने सपा सरकार बनने पर रामपुर में एम्स जैसा मेडिकल कॉलेज बनाने की बात भी कही। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमिल शर्मा ने कहा कि गठबंधन के तहत दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे और पार्टी नेतृत्व जिस उम्मीदवार को टिकट देगा, उसे पूरी ताकत से चुनाव लड़ाया जाएगा।
अब सवाल यह है कि चुनावी तैयारी आगे बढ़ने के साथ रामपुर में सपा के अलग-अलग धड़े किस तरह एक मंच पर आते हैं। गठबंधन का ऐलान हो चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक समन्वय और उम्मीदवारों के चयन को लेकर आने वाले फैसले काफी अहम होंगे।
रामपुर में सपा-कांग्रेस गठबंधन की घोषणा ने चुनावी तस्वीर को लेकर संकेत जरूर दिए हैं, लेकिन सपा के भीतर चल रही स्थानीय राजनीतिक खींचतान अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले महीनों में नेतृत्व और टिकट को लेकर होने वाले फैसले इस समीकरण की दिशा तय कर सकते हैं।
