
हरियाणा में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में नर्सिंग ऑफिसर्स की दो घंटे की पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू हो गई है। पंचकूला के सेक्टर-6 सिविल अस्पताल में सोमवार को ओपीडी और सामान्य वार्डों की नर्सिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को हड़ताल से बाहर रखा गया, जिससे गंभीर मरीजों का इलाज जारी रहा।
दो घंटे की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
पंचकूला के सेक्टर-6 स्थित सिविल अस्पताल में सोमवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक नर्सिंग ऑफिसर्स की पेन-डाउन स्ट्राइक रही। इस दौरान ओपीडी में मरीजों की पर्ची बनती रही, लेकिन इंजेक्शन, ड्रेसिंग, दवा वितरण और बीपी-शुगर जांच जैसी नियमित सेवाओं के लिए मरीजों को इंतजार करना पड़ा।
भर्ती मरीजों को रूटीन इंजेक्शन और ड्रिप लगाने में भी देरी हुई। कई तीमारदार मरीजों की जरूरत का सामान खुद जुटाते नजर आए।
5 से 7 अक्टूबर तक जारी रहेगी स्ट्राइक
नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर यह पेन-डाउन स्ट्राइक 5 से 7 अक्टूबर तक रोजाना सुबह 10 से 12 बजे तक आयोजित की जा रही है। एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश के करीब 5,500 नर्सिंग ऑफिसर्स और पंचकूला जिले के 100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर्स इसमें शामिल हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि विरोध का मुख्य कारण ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी है। नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि नीति के तहत पांच साल की सेवा पूरी होने के बाद कर्मचारियों को दूर-दराज के जिलों में स्थानांतरित किया जा सकता है।

इमरजेंसी सेवाओं को रखा गया हड़ताल से बाहर
नर्सिंग ऑफिसर्स ने मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं को आंदोलन से बाहर रखा है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, बच्चों की इमरजेंसी और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में सेवाएं सामान्य रहीं।
हालांकि, ओपीडी और जनरल वार्डों में नर्सिंग सेवाएं प्रभावित होने के कारण सामान्य उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
’95 प्रतिशत महिला स्टाफ, सुरक्षा का भी सवाल’
नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की स्टेट प्रेसिडेंट विनीता कुमारी ने कहा कि नर्सिंग कैडर में करीब 95 प्रतिशत महिला कर्मचारी हैं। उनके मुताबिक नर्सिंग ऑफिसर्स तीनों शिफ्ट में 24 घंटे मरीजों को सेवाएं देती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त सुरक्षा प्रोटोकॉल और नर्सिंग स्टाफ से चर्चा किए बिना पांच साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को दूर-दराज के जिलों में भेजने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
अकेले नाइट शिफ्ट को लेकर चिंता
एसोसिएशन ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर महिला नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है। विनीता कुमारी के अनुसार पीएचसी और सीएचसी स्तर पर कई बार महिला नर्सिंग ऑफिसर्स को महिला अटेंडेंट के बिना अकेले नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है।
उनका कहना है कि ऐसे हालात में दूर-दराज के स्थानों पर तबादले से सुरक्षा संबंधी चिंताएं और बढ़ सकती हैं। एसोसिएशन ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के पालन की मांग की है।
प्रशासन ने बातचीत से समाधान का भरोसा दिया
नर्सिंग ऑफिसर्स ने अपनी मांगों को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं प्रशासन की ओर से कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही गई है।
फिलहाल 5 से 7 अक्टूबर तक चलने वाली दो घंटे की पेन-डाउन स्ट्राइक से सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार और नर्सिंग ऑफिसर्स के बीच बातचीत से ट्रांसफर पॉलिसी को लेकर कोई समाधान निकलता है या नहीं।
