
असम सरकार ने एक से अधिक शादी करने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। शुक्रवार को विधानसभा में वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए घोषणा की कि बहुविवाह के दोषी पाए जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को सेवा से हटाने के लिए असम सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1964 में संशोधन किया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि एक से अधिक शादी करने वाला कोई भी पुरुष राज्य की अधिसूचित सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकेगा। इसके अलावा, किसी भी आपराधिक कानून के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को भी सरकारी वेलफेयर स्कीमों से वंचित रखने का प्रस्ताव है। सरकार ने कहा कि अगस्त से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का नया चरण शुरू होगा, जिसके लिए 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।

बजट में टैक्स राहत और अन्य घोषणाएं
वित्त मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने 2026-27 के लिए लगभग 2.85 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इसमें छोटे चाय उत्पादकों के लिए टैक्स छूट की सीमा चार गुना बढ़ाने और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) पर वैट में करीब 10 प्रतिशत की कटौती का भी प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का दावा है कि ये कदम राज्य के आर्थिक विकास और आम लोगों को राहत देने के लिए उठाए गए हैं।
पहले ही पास हो चुका है बहुविवाह निषेध कानून
गौरतलब है कि असम विधानसभा पिछले वर्ष असम प्रोहिबिशन ऑफ पॉलीगैमी एक्ट, 2025 पारित कर चुकी है। इस कानून के तहत पहली शादी कानूनी रूप से वैध होने के बावजूद दूसरी शादी करने या उसे छिपाने पर सात वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि यह कानून संविधान की छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों और अधिसूचित जनजातियों के कुछ वर्गों पर लागू नहीं होता। अब सरकार प्रशासनिक स्तर पर भी इसे सख्ती से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
