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दिल्ली में मच्छरों पर ड्रोन से वार, नैनी झील से शुरू हुआ अभियान

दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच नगर निगम ने पारंपरिक उपायों के साथ तकनीक का सहारा लिया है। मॉडल टाउन की नैनी झील में ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य दुर्गम जलाशयों और संभावित प्रजनन स्थलों तक तेजी से पहुंच बनाना है।

नैनी झील से नई शुरुआत

दिल्ली में मच्छर नियंत्रण अभियान को तकनीकी रूप देने की शुरुआत मॉडल टाउन की नैनी झील से हुई। महापौर प्रवेश वाही ने ड्रोन के जरिए कीटनाशक छिड़काव कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान निगम के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और कर्मचारी मौजूद रहे।

बड़े जलाशयों में ड्रोन बनेगा मददगार

महापौर के अनुसार, बड़े जलाशयों और ऐसे इलाकों में पारंपरिक तरीके से कीटनाशक पहुंचाना कई बार मुश्किल होता है। ड्रोन कम समय में बड़े क्षेत्र को कवर कर सकता है। इससे मच्छरों के संभावित प्रजनन स्थलों पर समय रहते कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

जरूरत के मुताबिक दिल्ली के अन्य जलाशयों और दुर्गम क्षेत्रों में भी इस तकनीक का विस्तार किया जा सकता है।

दिल्ली में मच्छरों पर ड्रोन से वार, नैनी झील से शुरू हुआ अभियान

फॉगिंग और लार्वा नियंत्रण भी जारी

ड्रोन के साथ निगम का पारंपरिक अभियान भी जारी है। फील्ड टीमें जलाशयों, नालों, खाली प्लॉट, निर्माण स्थलों और पानी जमा होने वाले स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं। लार्वा रोधी दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग भी की जा रही है।

स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि मच्छर प्रजनन स्थलों की पहचान और नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

आंकड़े बता रहे हैं चुनौती

एमसीडी के 22 अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में डेंगू के 272, मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। राहत की बात यह है कि इन बीमारियों से अब तक किसी मौत की सूचना नहीं है। हालांकि 16 से 22 अगस्त के बीच डेंगू के 26 और मलेरिया के 15 नए मामले सामने आए।

घरों में पानी जमा न होने दें

मच्छर नियंत्रण केवल निगम की जिम्मेदारी नहीं है। घरों और आसपास जमा साफ पानी भी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है। इसलिए कूलर, गमले, छतों, बाल्टियों और अन्य कंटेनरों की नियमित जांच जरूरी है।

तकनीक के साथ जनता की भागीदारी जरूरी

ड्रोन से छिड़काव अभियान को तेज जरूर कर सकता है, लेकिन बीमारी की रोकथाम के लिए लगातार निगरानी और नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही अहम है। दिल्ली में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया पर नियंत्रण का रास्ता तकनीक, प्रशासन और जनता—तीनों के साझा प्रयास से ही मजबूत होगा।

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