मुंबई की बारिश पर आदित्य ठाकरे का हमला, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Aaditya Thackeray ने मुंबई में बारिश के दौरान पैदा हुई अव्यवस्था और जलभराव की समस्या को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुंबई की नई मेयर का ध्यान शहर की मूलभूत समस्याओं को हल करने के बजाय अन्य मुद्दों पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है। ठाकरे ने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान शुरू की गई कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन कई महत्वपूर्ण कार्य अब भी अधूरे पड़े हैं।
जलभराव और नागरिक समस्याओं पर सरकार घिरी
आदित्य ठाकरे ने कहा कि हर साल बारिश के दौरान मुंबईवासियों को जलभराव और ट्रैफिक जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन सरकार इन चुनौतियों से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों की परेशानियां कम करने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
मुंबई लोकल हत्या मामले पर जताई चिंता
हाल ही में मुंबई लोकल ट्रेन में हुई हत्या की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ठाकरे ने कहा कि शहर में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और गृह विभाग इस तरह के मामलों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। हालांकि पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन ठाकरे का कहना है कि कानून-व्यवस्था को लेकर व्यापक सुधार की जरूरत है ताकि नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।

केईएम अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठाए सवाल
KEM Hospital के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर भी आदित्य ठाकरे ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अस्पताल का नाम बदलने से ज्यादा जरूरी उसकी स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों को मजबूत करना है। ठाकरे के अनुसार अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं, स्टाफ और उपकरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार का ध्यान इन मुद्दों पर पर्याप्त नहीं है।
राम मंदिर और उज्जैन विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया
राम मंदिर चढ़ावा विवाद और उज्जैन में कथित जमीन घोटाले के आरोपों पर पूछे गए सवालों के जवाब में आदित्य ठाकरे ने कहा कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर भी कहा कि सरकार को पहले उसका मसौदा सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि उसके प्रावधानों पर व्यापक चर्चा हो सके।