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ओडिशा की नई स्कूली किताब में ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ से विवाद, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तैयार की गई ओडिशा की नई स्कूली पाठ्यपुस्तकें एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। पहले किताबों में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों त्रुटियों को लेकर सरकार घिरी थी और अब आठवीं कक्षा की कला शिक्षा की पुस्तक में लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों के बोल शामिल किए जाने पर नई बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया से लेकर शिक्षा जगत तक इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

आठवीं की किताब में शामिल किए गए लोकप्रिय गीत

विवाद आठवीं कक्षा की कला शिक्षा की पुस्तक ‘कृति’ को लेकर है। पुस्तक के “मो संगीत जगत” अध्याय में प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ के पूरे बोल प्रकाशित किए गए हैं। यह गीत पारंपरिक लोकधुन पर आधारित है, लेकिन फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के बाद पूरे देश में लोकप्रिय हुआ था।

इसी अध्याय में कश्मीरी लोकगीत ‘रिंद पोश माल’ को भी शामिल किया गया है, जिसे फिल्म ‘मिशन कश्मीर’ के जरिए व्यापक पहचान मिली थी।

स्थानीय संस्कृति को प्राथमिकता देने की उठी मांग

इन गीतों के पाठ्यक्रम में शामिल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि ओडिशा की स्कूली पुस्तकों में राज्य की ओड़िया लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और शास्त्रीय विरासत को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए था।

ओडिशा की नई स्कूली किताब में 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' से विवाद, पाठ्यक्रम की गुणवत्ता पर फिर उठे सवाल

लोगों का मानना है कि स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाले गीतों और साहित्य को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि छात्र अपनी विरासत से बेहतर तरीके से जुड़ सकें।

पहले भी किताबों में मिली थीं 1,678 गलतियां

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां मिलने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। इन त्रुटियों में तथ्यात्मक गलतियां, भाषा संबंधी अशुद्धियां और सामग्री से जुड़ी खामियां शामिल थीं।

मामले ने तूल पकड़ने के बाद शिक्षकों, अभिभावकों और विपक्षी दलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे।

जांच के बाद अधिकारियों पर हुई कार्रवाई

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर एससीईआरटी के चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया, जिनमें पूर्व निदेशक मनोज पाढ़ी और तीन सहायक निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।

जांच समिति ने 14 महत्वपूर्ण सिफारिशें भी दी हैं। इनमें पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग क्वालिटी एश्योरेंस सेल बनाना, मास्टर एराटा रजिस्टर तैयार करना और सभी छात्रों तक समय पर संशोधित सामग्री पहुंचाना शामिल है।

भविष्य में गुणवत्ता पर रहेगा विशेष फोकस

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी पाठ्यपुस्तक को भाषा, तथ्य, चित्र और विषयवस्तु के हर स्तर पर पूरी जांच के बाद ही छपाई की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ‘निंबूड़ा-निंबूड़ा’ और ‘रिंद पोश माल’ जैसे गीतों को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम निर्माण और स्थानीय सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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