
खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए हवाई यात्रा का खर्च एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए खाड़ी क्षेत्र के लिए किफायती हवाई किराए फिर से शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों में अपने परिवारों से मिलने आने वाले भारतीय कामगारों पर बढ़ते किराए का भारी दबाव पड़ रहा है। तन्खा ने सरकार से अपील की है कि या तो हवाई किराए में कटौती की जाए या फिर यात्रियों को सब्सिडी दी जाए ताकि वे आसानी से अपने घर आ सकें।
तीन केंद्रीय मंत्रियों को लिखा पत्र, किराए पर तत्काल समीक्षा की मांग
इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए विवेक तन्खा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों और यूएई में रहने वाले भारतीयों के लिए मौजूदा हवाई किराया बेहद महंगा हो गया है। उन्होंने आग्रह किया कि भारत और खाड़ी देशों के बीच उड़ानों के किराए की समीक्षा की जाए और इसे जून से अगस्त के बीच किफायती स्तर पर लाया जाए। तन्खा का कहना है कि यह समय प्रवासी भारतीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वे इसी दौरान अपने परिवारों से मिलने भारत आते हैं।

एक करोड़ से अधिक भारतीय प्रभावित, यात्रा खर्च ने बढ़ाई मुश्किलें
सांसद ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र और यूएई में एक करोड़ से अधिक भारतीय कामगार रहते हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें अपने नियोक्ताओं से हर साल लगभग 1000 दिरहम का फिक्स ट्रैवल अलाउंस मिलता है, जो पहले यात्रा खर्च के लिए पर्याप्त माना जाता था। लेकिन पिछले कुछ समय में हवाई किराया दोगुना हो गया है, जिससे यह अलाउंस अब बेहद कम पड़ने लगा है। नतीजा यह है कि कई कामगार अब भारत आकर अपने परिवारों से मिलने में असमर्थ हैं और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
परिवार से दूरी बढ़ी, सब्सिडी या किराया नियंत्रण की मांग तेज
विवेक तन्खा ने अपने पत्र में चिंता जताई कि जो भारतीय हर साल अपने घर लौटकर परिवारों से मिलते थे, वे अब बढ़ते किराए के कारण यह यात्रा नहीं कर पा रहे हैं। इससे प्रवासी भारतीयों के बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि भारत-खाड़ी मार्गों पर हवाई किराए को नियंत्रित किया जाए या फिर विशेष सब्सिडी की व्यवस्था की जाए ताकि यह समस्या कम हो सके। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव से जुड़ा गंभीर मामला है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।