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भोपाल BU विवाद: 33 घंटे बाद खत्म हुआ ABVP का धरना, कुलपति को 15 दिन की छुट्टी पर भेजा गया

भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) में अकादमिक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का आंदोलन आखिरकार 33 घंटे बाद समाप्त हो गया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के हस्तक्षेप और कुलपति को अवकाश पर भेजे जाने के आश्वासन के बाद परिषद ने अपना धरना समाप्त करने की घोषणा की।

ABVP पिछले कई दिनों से विश्वविद्यालय में व्याप्त विभिन्न समस्याओं को लेकर आंदोलन कर रही थी। परिषद के कार्यकर्ता और छात्र कुलपति कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे। आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मंत्रालय में चर्चा की और इसके बाद सीधे विश्वविद्यालय पहुंचे।

धरना स्थल पर पहुंचकर मंत्री ने आंदोलनरत छात्रों और ABVP पदाधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय में व्याप्त अकादमिक एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। छात्रों ने लंबित परीक्षाफल, पुनर्मूल्यांकन में देरी, पीएचडी प्रवेश परीक्षा, नर्सिंग कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया, संबद्धता में पारदर्शिता, शिक्षकों की भर्ती और छात्रावासों की समस्याओं सहित कई मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

विद्यार्थियों की मांगों को सुनने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि कुलपति के संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद देर शाम उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर कुलपति का 15 दिनों का अग्रिम अवकाश स्वीकृत कर दिया। इस फैसले के बाद ABVP ने अपना आंदोलन स्थगित करने का ऐलान कर दिया।

ABVP के प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि यह केवल विद्यार्थी परिषद की जीत नहीं है, बल्कि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के हजारों छात्रों की जीत है। उन्होंने कहा कि परिषद लगातार छात्रों के हितों और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए संघर्ष करती रहेगी।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक मुद्दों को लेकर छात्रों में असंतोष बढ़ रहा था। परीक्षा परिणामों में देरी और अकादमिक कैलेंडर के अव्यवस्थित होने जैसी समस्याओं को लेकर छात्रों ने कई बार आवाज उठाई थी।

अब छात्रों और शिक्षकों की निगाहें उच्च शिक्षा विभाग और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार और लंबित समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल कुलपति को अवकाश पर भेजे जाने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति सामान्य होती दिखाई दे रही है।

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