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₹10 हजार की नौकरी, करोड़ों की संपत्ति! झारखंड के दो कंप्यूटर ऑपरेटरों पर पेंशन घोटाले का आरोप

झारखंड के साहिबगंज जिले में सामने आए कथित पेंशन घोटाले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर दो कंप्यूटर ऑपरेटरों ने करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली। मामले की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, बरहेट और बोरियो प्रखंड में कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटरों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर अपात्र लोगों को भी पेंशन योजना का लाभ दिलाया। जांच में यह भी सामने आया है कि एक संगठित गिरोह कम उम्र या पात्रता पूरी न करने वाले लोगों के नाम पर फर्जी पेंशन स्वीकृत करवाता था। इसके बदले लाभार्थियों से 5 से 7 हजार रुपये तक वसूले जाते थे। बताया जा रहा है कि इस राशि में से करीब 2 हजार रुपये कंप्यूटर ऑपरेटरों को मिलते थे, जबकि बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी।

आरोपों के केंद्र में बरहेट प्रखंड के पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर राहुल कुमार मंडल और बोरियो प्रखंड के शशि कुमार पासवान हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि दोनों की आर्थिक स्थिति नौकरी लगने के बाद तेजी से बदली। राहुल, जो कभी साइकिल से चलता था, आज कथित तौर पर 14 चक्के के व्यावसायिक वाहन और आलीशान मकान का मालिक है। वहीं शशि ने भी मोटरसाइकिल से लेकर महंगी कार और शानदार घर तक का सफर कुछ ही वर्षों में तय कर लिया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोनों के कार्यकाल के दौरान स्वीकृत पेंशन मामलों की गहन जांच की जाए तो और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि प्रशासन को वर्षों पहले संभावित गड़बड़ियों की जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला राज्य के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा घोटालों में से एक बन सकता है। प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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