
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जयपुर में आयोजित भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब कार्यक्रम के बीच अचानक बिजली गुल हो गई। हालात ऐसे बने कि केंद्रीय रेल एवं सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में पत्रकारों से संवाद जारी रखना पड़ा। वहीं मंच पर मौजूद राजस्थान के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर बिजली आपूर्ति बहाल कराने के लिए अधिकारियों से लगातार संपर्क करते नजर आए।
जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अश्विनी वैष्णव केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों को विस्तार से गिना रहे थे। इसी दौरान अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई और पूरा सभागार अंधेरे में डूब गया। कार्यक्रम में मौजूद पत्रकारों, पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं के बीच कुछ देर के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई।
बिजली जाने के बाद ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने तत्काल अधिकारियों से संपर्क कर व्यवस्था बहाल कराने का प्रयास शुरू किया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ समेत अन्य वरिष्ठ नेता भी स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। हालांकि, करीब 22 मिनट तक बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कार्यक्रम को रुकने नहीं दिया। वह अपनी सीट से उठकर पत्रकारों के बीच पहुंचे और मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर सवालों के जवाब देने लगे। अंधेरे में चलती यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पूरे कार्यक्रम का सबसे चर्चित दृश्य बन गई।
घटना इसलिए भी सुर्खियों में रही क्योंकि यह भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में हुई और उस समय राज्य के ऊर्जा मंत्री भी मंच पर मौजूद थे। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
नागौर से सांसद Hanuman Beniwal ने भी इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा कि मंच पर रेल मंत्री मौजूद थे और सामने ऊर्जा मंत्री बैठे थे, फिर भी अंधेरा छाया रहा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो राजस्थान की बिजली व्यवस्था ने स्वयं अपनी स्थिति का प्रदर्शन कर दिया हो।
बेनीवाल ने आगे लिखा कि जहां रेल मंत्री विकास की बातें बुलेट ट्रेन की रफ्तार से कर रहे थे, वहीं राजस्थान की बिजली व्यवस्था अब भी पैसेंजर ट्रेन जैसी गति से चलती दिखाई दी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद भी बिजली कटौती और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पूरे दिन चर्चा का केंद्र बनी रहीं।
इस अप्रत्याशित घटना ने एक ओर जहां सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए, वहीं दूसरी ओर मोबाइल की टॉर्च के सहारे जारी रही प्रेस कॉन्फ्रेंस ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।