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सहजनवा की दो बहनों ने ऑल इंडिया जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में जीते आठ पदक, गोरखपुर और यूपी का बढ़ाया गौरव

सहजनवा की दो बहनों ने राष्ट्रीय जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में ऐसा प्रदर्शन किया कि गोरखपुर से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई। वैष्णवी और काव्यांजलि ने मिलकर आठ पदक जीतकर साबित किया कि अनुशासन, मेहनत और परिवार का साथ मिले तो छोटी उम्र में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।

दो बहनों ने रचा शानदार रिकॉर्ड

मंगलवार को संपन्न हुई ऑल इंडिया जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में सहजनवा की वैष्णवी मिश्रा और काव्यांजलि मिश्रा ने शानदार प्रदर्शन किया। दोनों बहनों ने अलग-अलग स्तरों पर हिस्सा लेते हुए कुल 8 पदक अपने नाम किए।

इस उपलब्धि के बाद उनके परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में इतनी कम उम्र में दोनों का प्रदर्शन स्थानीय खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।

वैष्णवी ने जीते चार स्वर्ण

11 वर्षीय वैष्णवी मिश्रा ने प्रतियोगिता के लेवल-7 में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अलग-अलग स्पर्धाओं में चार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

सहजनवा की दो बहनों ने ऑल इंडिया जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में जीते आठ पदक, गोरखपुर और यूपी का बढ़ाया गौरव

कम उम्र में लेवल-7 जैसी प्रतिस्पर्धा में लगातार स्वर्ण जीतना उनके नियमित अभ्यास और तकनीकी तैयारी को दर्शाता है। वैष्णवी की यह उपलब्धि उनके खेल करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।

काव्यांजलि ने भी दिखाया दम

वैष्णवी की छोटी बहन काव्यांजलि मिश्रा ने भी प्रतियोगिता में पीछे रहने का नाम नहीं लिया। उन्होंने लेवल-4 में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीतकर कुल चार पदक अपने नाम किए।

दोनों बहनों का एक ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतना परिवार के लिए खास उपलब्धि है। उनकी सफलता ने सहजनवा का नाम भी राष्ट्रीय जिम्नास्टिक्स के मंच पर पहुंचाया है।

सेना से जुड़ा है परिवार

वैष्णवी और काव्यांजलि एक सैन्य परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता लेफ्टिनेंट कर्नल कमलेश मिश्रा और लेफ्टिनेंट कर्नल वंदना शुक्ला भारतीय सेना में सेवारत अधिकारी हैं।

परिवार की सैन्य परंपरा की एक और कड़ी उनके दादा ऑनरेरी कैप्टन ओम प्रकाश मिश्रा हैं, जो भारतीय सेना के सेवानिवृत्त वेटरन हैं। यानी परिवार की तीन पीढ़ियों का जुड़ाव सेना से रहा है, जबकि नई पीढ़ी ने खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है।

मेहनत और अनुशासन बना सफलता का आधार

जिम्नास्टिक्स ऐसा खेल है जिसमें ताकत के साथ संतुलन, लचीलापन, तकनीक और मानसिक एकाग्रता की भी जरूरत होती है। दोनों बहनों की सफलता के पीछे नियमित प्रशिक्षण, अनुशासन और प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण रहा है।

माता-पिता ने अपनी सैन्य जिम्मेदारियों के बावजूद बेटियों को खेल में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित किया। यही पारिवारिक सहयोग उनकी यात्रा की मजबूत नींव बना।

अब नजर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर

आठ पदकों की यह उपलब्धि दोनों बहनों के लिए सिर्फ शुरुआत है। वैष्णवी और काव्यांजलि अब जिम्नास्टिक्स में लगातार प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ना चाहती हैं।

उनका लक्ष्य भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करना है। सहजनवा की इन दोनों बेटियों ने पदकों के साथ एक बड़ा संदेश भी दिया है—प्रतिभा को सही दिशा, अनुशासन और अवसर मिले तो छोटे शहरों से भी देश के बड़े खिलाड़ी निकल सकते हैं।

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