
पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से होनी चाहिए।
नितिन नवीन के पोस्ट पर केजरीवाल का जवाब
अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के एक पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए पंजाब में नशे के मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा को पंजाब की चिंता है तो गुजरात से आने वाले नशीले पदार्थों को रोकने के लिए भी कार्रवाई होनी चाहिए।
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई पंजाब से नहीं, बल्कि मुंद्रा पोर्ट से शुरू होनी चाहिए। यह उनका राजनीतिक आरोप और मांग है।
भाजपा ने शुरू की ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 18 सितंबर को पठानकोट से पार्टी की 13 दिवसीय ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ की शुरुआत की थी। भाजपा के अनुसार यह अभियान राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुंचेगा और चार यात्राएं मिलकर करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी। अभियान का समापन 30 सितंबर को जालंधर में प्रस्तावित है।
नितिन नवीन ने अभियान के दौरान नशे की तस्करी रोकने, सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई, नशीले पदार्थों से जुड़ी अवैध संपत्ति जब्त करने और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दों को उठाया है।

केजरीवाल ने सप्लाई नेटवर्क पर उठाया सवाल
केजरीवाल ने बहस का केंद्र पंजाब में नशे की मौजूदगी से हटाकर उसके कथित सप्लाई नेटवर्क और प्रवेश मार्गों की ओर करने की कोशिश की है। उन्होंने विशेष रूप से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का उल्लेख किया।
इससे पहले 15 सितंबर को भी केजरीवाल ने दावा किया था कि पंजाब में आने वाले नशीले पदार्थों का बड़ा हिस्सा भाजपा शासित राज्यों से आता है और उन्होंने मुंद्रा पोर्ट के जरिए देश में नशीले पदार्थों की कथित तस्करी का मुद्दा उठाया था। ये आंकड़े और आरोप केजरीवाल के राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
पंजाब सरकार और भाजपा के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप
नशे का मुद्दा पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक विषय बनता जा रहा है। भाजपा पंजाब की AAP सरकार से नशे की समस्या पर उसके कामकाज को लेकर सवाल कर रही है, जबकि AAP नेता भाजपा और केंद्र से अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क पर कार्रवाई करने की मांग उठा रहे हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी हाल में भाजपा की ‘नशा मुक्त यात्रा’ के संदर्भ में मुंद्रा पोर्ट का मुद्दा उठाया था। इससे पहले AAP और भाजपा के बीच नशे के स्रोत, तस्करी और सरकारी कार्रवाई को लेकर कई दौर में राजनीतिक बयानबाजी हो चुकी है।
2027 चुनाव से पहले नशा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए नशे का मुद्दा राजनीतिक अभियानों के केंद्र में आता जा रहा है। भाजपा अपनी यात्रा के जरिए नशे के खिलाफ अभियान चला रही है, जबकि AAP नेता राज्य के बाहर से होने वाली कथित सप्लाई और तस्करी के रास्तों पर कार्रवाई का मुद्दा उठा रहे हैं।
इस राजनीतिक बहस में दो अलग-अलग पहलू सामने आ रहे हैं—पंजाब के भीतर नशे की उपलब्धता और वितरण पर कार्रवाई तथा दूसरे राज्यों और अंतरराष्ट्रीय रास्तों से आने वाली कथित सप्लाई को रोकना। दोनों दल इस मुद्दे को लेकर अपनी-अपनी जिम्मेदारी और नीति पर जोर दे रहे हैं।
मुंद्रा पोर्ट को लेकर केजरीवाल की मांग
केजरीवाल के ताजा बयान से साफ है कि AAP नशे के मुद्दे पर भाजपा के पंजाब-केंद्रित अभियान के जवाब में सप्लाई के स्रोतों और प्रवेश मार्गों पर कार्रवाई की मांग को प्रमुखता देना चाहती है। हालांकि मुंद्रा पोर्ट से पंजाब में नशीले पदार्थों की आपूर्ति को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों और उनके प्रमाणों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फिलहाल पंजाब में नशे का मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा विषय भी बना हुआ है।
