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गाजीपुर में अखिलेश यादव के खिलाफ ‘माफिया राज’ वाले फ्लैक्स, सपा ने जताया विरोध; पुलिस कार्रवाई की मांग

गाजीपुर में समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को निशाना बनाकर लगाए गए फ्लैक्स से राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। फ्लैक्स में अखिलेश यादव के साथ मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, मुन्ना बजरंगी, रमाकांत यादव और उमाकांत यादव की तस्वीरें लगाई गई हैं। पोस्टरों में पूर्व सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर राजनीतिक आरोप लगाए गए हैं।

आधा दर्जन स्थानों पर रातों-रात लगाए गए फ्लैक्स

गाजीपुर शहर में विकास भवन, सिंचाई चौराहा, रेलवे स्टेशन और रौजा समेत करीब आधा दर्जन स्थानों पर रात के समय फ्लैक्स लगाए जाने की बात सामने आई है। इन फ्लैक्स में अखिलेश यादव के साथ पूर्वांचल से जुड़े कई चर्चित अपराधियों की तस्वीरें दिखाई गई हैं।

फ्लैक्स पर संदेश के जरिए यह आरोप लगाया गया है कि इन लोगों का पूर्व सपा सरकार के दौरान सत्ता पर प्रभाव था। हालांकि, फ्लैक्स किस संगठन या व्यक्ति ने लगवाए, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

पोस्टर में किन लोगों की तस्वीरें?

गाजीपुर में सामने आए फ्लैक्स में अखिलेश यादव के अलावा मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, मुन्ना बजरंगी, रमाकांत यादव और उमाकांत यादव की तस्वीरें शामिल हैं।

यह मामला प्रदेश में चल रहे व्यापक ‘पोस्टर वार’ से भी जुड़ा बताया जा रहा है। 21 सितंबर को लखनऊ, उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत कई जिलों में सपा के खिलाफ इसी तरह के पोस्टर सामने आए।

लोकगीत भारतीय संस्कृति में अभिव्यक्ति का वो रूप है, जिसमें गांव-देहात के आम जीवन से लेकर आजादी संघर्ष तक की गूंज सुनाई देती है। इन्हीं में एक है भोजपुरी भाषा में आज 100 साल से भी पहले लिखा गया यह लोकप्रिय गीत। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसमें बिहार नहीं, बल्कि पूरे भारत की खूबसूरती का बखान किया गया है। ऐसे में यह कहने में कोई दो राय नहीं कि लोकगीत मनोरंजन करने के साथ ही समाज की दिशा-दशा भी दिखाते हैं। 

‘बटोहिया’ गीत जिसमें बसता है पूरा भारत 
बिहार का मशहूर ‘बटोहिया’ जिसे ‘सुंदर सुभूमि भैया’ के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा भोजपुरी देशभक्ति गीत है जिसे सुनने पर सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। इसकी रचना साल 1911 में बिहार के सारण जिले के रहने वाले बाबू रघुबीर नारायण ने की थी। 

कहते हैं कि रघुबीर नारायण अंग्रेजी में लिखा करते थे, लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें एक मुलाकात के दौरान भोजपुरी में लिखने की प्रेरणा दी थी। इसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कहने पर ही इस ऐतिहासिक भोजपुरी गीत को लिखा गया। 
‘बटोहिया’ गीत किसके लिए लिखा गया? 
भोजपुरी शब्द ‘बटोहिया’ का मतलब यात्री होता है। यह भी बताते चलें कि भोजपुरी में गाए जाने वाले इस गीत का नाता भारत की आजादी के साथ ही गिरमिटिया मजदूरों से भी है। यहीं से यात्री की कड़ी इस गीत से जुड़ती है क्योंकि इस गीत में ब्रिटिश शासन के दौरान एक गिरमिटिया मजदूर एक यात्री को भारत के बारे में बता रहा है। वह अपने देश की तुलना धरती पर स्वर्ग के रूप में कर रहा है।

तभी तो इस गीत को बिहार में इतनी लोकप्रियता मिली कि वह इस राज्य में राष्ट्रगीत तक कहलाने लगा था, पर समय के साथ इस गीत की ख्याति कहीं खोती चली गई। 

भारत की खूबसूरती से बयां करता है यह गीत 
‘सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से... तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया’ पंक्ति में भारत को स्वर्ग के समान दर्जा दिया गया है। यह गीत कहता है भारत एक सुंदर और पवित्र भूमि है, जिसमें मेरे प्राण बसते हैं। इसके उत्तर में हिमालय एक कोतवाल की तरह रक्षा कर रहा है, तो तीनों ओर से समंदर ने इसे घेर रखा है। 

‘जाऊ-जाऊ भैया रे बटोही हिंद देखी आउ... कामिनी बिरह-राग गावे रे बटोहिया’ इसके बाद की पंक्तियों में चारों वेदों को ऋषि मुनियों द्वारा गाए जाने के साथ ही प्रभु श्री राम, माता सीता और भगवान श्रीकृष्ण की गाथाओं का भी जिक्र मिलता है। 

भोजपुरी से आगे बटोहिया की पहचान 
आपको जानकार हैरानी होगी कि यह पहला ऐसा भोजपुरी गीत है जिसे 7 अलग-अलग देशों के 11 गायकों ने एक साथ मिलकर गाया है। इनमें भारत, सूरीनाम, हॉलैंड, मॉरीशस, त्रिनिदाद, गुयाना और फिजी शामिल है।

नगर पालिका ठेकेदार ने बिना अनुमति लगाने की बात कही

नगर पालिका परिषद के ठेकेदार यशवंत राय के अनुसार, इन फ्लैक्स को उनकी अनुमति के बिना रातों-रात लगाया गया। उन्होंने मामले में पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।

अब जांच का विषय यह है कि फ्लैक्स किसने तैयार कराए, उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया और सार्वजनिक स्थानों पर इन्हें लगाने की अनुमति किस स्तर से ली गई थी।

सपा ने बताया राजनीतिक हमला

फ्लैक्स सामने आने के बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि अखिलेश यादव और सपा को आपराधिक चेहरों के साथ जोड़कर पार्टी की छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।

सपा की ओर से इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया गया है और प्रशासन से फ्लैक्स लगाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की मांग की गई है।

भाजपा की ओर से सपा पर राजनीतिक निशाना

दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने पोस्टरों में उठाए गए मुद्दों को सपा के पिछले शासनकाल से जोड़ते हुए राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सपा के शासनकाल में कई आपराधिक छवि वाले लोगों का राजनीतिक प्रभाव था।

हालांकि, ये आरोप राजनीतिक दलों के दावे हैं। पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

2027 चुनाव से पहले बढ़ा पोस्टर वार

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज है। हालिया पोस्टर अभियान में अलग-अलग क्षेत्रों के चर्चित आपराधिक मामलों से जुड़े नामों को सपा से जोड़कर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है।

गाजीपुर में लगाए गए फ्लैक्स के बाद अब स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की आगे की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

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