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DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, NSUI का खाता नहीं खुला; JDU नेता ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 के नतीजों में ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की, जबकि NSUI कोई केंद्रीय पद नहीं जीत सकी। निर्दलीय दीपांशु शौकीन उपाध्यक्ष चुने गए। नतीजों के बाद JDU नेता राजीव रंजन ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए इसे छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक संदेश बताया।

ABVP ने जीतीं तीन केंद्रीय सीटें

DUSU चुनाव में ABVP के यश डबास अध्यक्ष, रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। इस तरह ABVP को चार में से तीन केंद्रीय पद मिले।

अध्यक्ष पद पर यश डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि NSUI के विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिले।

NSUI को नहीं मिली कोई केंद्रीय सीट

इस चुनाव में कांग्रेस से संबद्ध छात्र संगठन NSUI चारों केंद्रीय पदों में से किसी पर जीत दर्ज नहीं कर सका। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, 2015 के बाद यह पहली बार है जब NSUI DUSU के केंद्रीय पैनल में कोई पद हासिल नहीं कर सकी।

हालांकि, उपाध्यक्ष पद जीतने वाले दीपांशु शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे हैं और इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे थे।

राजीव रंजन ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

DUSU नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए JDU नेता राजीव रंजन ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने परिणाम को छात्रों और युवाओं के बीच कांग्रेस की राजनीति को लेकर नाराजगी का संकेत बताया।

राजीव रंजन ने राहुल गांधी की ओर से व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि DUSU परिणाम को उसी राजनीतिक बहस के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके ये बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया और उनका आकलन हैं, न कि चुनाव परिणाम से स्वतः साबित होने वाला निष्कर्ष।

DUSU चुनाव में ABVP की 3 सीटों पर जीत, NSUI का खाता नहीं खुला; JDU नेता ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

झारखंड-पंजाब का भी किया जिक्र

राजीव रंजन ने अपने बयान में झारखंड और पंजाब सहित अलग-अलग राज्यों में छात्र एवं युवा मुद्दों पर कांग्रेस के रुख को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों की घटनाओं को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस का दृष्टिकोण अलग रहा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि छात्रों को राजनीतिक रूप से विभाजित करने की कोशिशों को लेकर युवाओं में असंतोष है। इन दावों को राजीव रंजन के राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

पिछले चुनाव का भी दिया हवाला

JDU नेता ने पिछले DUSU चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि NSUI ने पिछली बार उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी, जबकि इस बार वह केंद्रीय पैनल की किसी सीट पर नहीं जीत सकी।

हालांकि, DUSU चुनाव के नतीजे अपने आप में केवल दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र मतदाताओं के इस चुनाव का परिणाम बताते हैं। इन्हें पूरे देश या सभी युवाओं की राजनीतिक राय का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि मानने के लिए अलग से व्यापक आंकड़ों की जरूरत होगी।

DUSU नतीजों में क्या रहा खास?

2026 के चुनाव में 20 उम्मीदवार चार केंद्रीय पदों के लिए मैदान में थे और मतदान प्रतिशत 40.46% रहा। ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीते, जबकि उपाध्यक्ष पद निर्दलीय दीपांशु शौकीन के खाते में गया।

इस परिणाम के बाद छात्र संगठनों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। NSUI की ओर से चुनाव प्रक्रिया को लेकर आरोप लगाए गए हैं, जबकि चुनाव परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित हो चुके हैं।

DUSU चुनाव 2026 में ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पदों पर जीत दर्ज की, जबकि NSUI केंद्रीय पैनल में कोई सीट नहीं जीत सकी। निर्दलीय दीपांशु शौकीन के उपाध्यक्ष चुने जाने से चुनाव का परिणाम चारों पदों पर किसी एक संगठन की जीत में नहीं बदला। नतीजों के बाद JDU नेता राजीव रंजन ने इसे राहुल गांधी और कांग्रेस की छात्र राजनीति से जोड़कर अपनी राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है।

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