परप्पना अग्रहारा जेल में मोबाइल मिलने के बाद अधिकारी निलंबित, किरण बेदी ने सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर सवाल किए

बेंगलुरु की परप्पना अग्रहारा जेल में प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मोबाइल मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी ने पूछा कि आखिर नियमित तलाशी के बावजूद फोन जेल के भीतर पहुंचा कैसे और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
जेल में मोबाइल मिलने से मचा हड़कंप
परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में केंद्रीय अपराध शाखा यानी CCB की छापेमारी के दौरान पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से एक Android मोबाइल फोन बरामद किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को हाई-प्रोफाइल और अन्य कैदियों के खिलाफ चार से पांच घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया था।
इससे पहले 6 अगस्त को भी रेवन्ना की बैरक की तलाशी ली गई थी, लेकिन उस समय कोई प्रतिबंधित सामान नहीं मिला था। अब इसी बात ने जेल की तलाशी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किरण बेदी ने उठाए दो बड़े सवाल
पूर्व IPS अधिकारी और तिहाड़ जेल की पूर्व महानिरीक्षक किरण बेदी ने इस मामले पर दो सीधे सवाल उठाए हैं। उनका सवाल है कि क्या रेवन्ना की ठीक से तलाशी नहीं ली गई थी? अगर तलाशी हुई थी तो फिर मोबाइल जेल के भीतर पहुंचा कैसे?

बेदी के मुताबिक, किसी कैदी के पास प्रतिबंधित वस्तु मिलना अपने आप में तलाशी प्रक्रिया की कमी की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि प्रवेश बिंदुओं पर इलेक्ट्रॉनिक जांच व्यवस्था होने के बावजूद फोन अंदर पहुंचना गंभीर सुरक्षा सवाल पैदा करता है।
जिम्मेदारी तय करने की जरूरत
किरण बेदी का कहना है कि फोन अगर किसी तरह छिपाकर अंदर ले जाया गया, तो यह पता लगाना जरूरी है कि उस समय तलाशी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी। उनके मुताबिक, ऐसी चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।
जेल प्रशासन ने भी घटना को हल्के में नहीं लिया है। पुलिस महानिदेशक (जेल एवं सुधार सेवाएं) आलोक कुमार के मुताबिक, मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
अधिकारी पर हुई कार्रवाई
घटना के बाद जेल प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की है। पुलिस महानिदेशक (दक्षिण) की रिपोर्ट के आधार पर सहायक अधीक्षक इरन्ना रंगापुर को ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है।
वहीं, बेंगलुरु केंद्रीय कारागार के अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इससे साफ है कि जांच सिर्फ मोबाइल मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि जेल के अंदरूनी सुरक्षा तंत्र की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
हाई-प्रोफाइल कैदी के पास फोन क्यों गंभीर?
जेल में मोबाइल फोन सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं है। ऐसे उपकरण का इस्तेमाल बाहरी संपर्क, संचार या अन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। खासकर हाई-प्रोफाइल कैदी के मामले में इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।
प्रज्वल रेवन्ना पहले से गंभीर आपराधिक मामले में सजा काट रहे हैं। ऐसे में उनकी बैरक से मोबाइल बरामद होना जेल प्रशासन के लिए एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
अब जांच के सामने सबसे बड़ा सवाल
इस मामले में अब दो पहलुओं पर नजर रहेगी—मोबाइल जेल के अंदर कैसे पहुंचा और इसे लेकर किस स्तर पर लापरवाही हुई। अगर किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
किसी जेल की सुरक्षा सिर्फ ऊंची दीवारों से तय नहीं होती, बल्कि हर प्रवेश और हर तलाशी की विश्वसनीयता से होती है। प्रज्वल रेवन्ना की बैरक से मिला मोबाइल अब इसी पूरी व्यवस्था की परीक्षा बन गया है।