
राजस्थान के तिजारा नगर परिषद में सभापति चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश से लौट रहे कांग्रेस समर्थित 18 पार्षदों को हरियाणा के चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास पुलिस द्वारा रोके जाने का कांग्रेस ने आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं ने इसे मतदान प्रभावित करने की कोशिश बताया है।
हिमाचल से लौट रहे थे पार्षद
तिजारा नगर परिषद के सभापति पद के लिए सोमवार, 21 सितंबर को मतदान होना था। इससे पहले कांग्रेस समर्थित पार्षद हिमाचल प्रदेश से लौट रहे थे। कांग्रेस के अनुसार रविवार रात करीब 9 बजे चंडीमंदिर-सूरजपुर टोल प्लाजा के पास पुलिस ने उनके वाहनों को रोक लिया।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 18 पार्षदों के काफिले को रोके जाने का दावा किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद तिजारा की स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई।
पिंजौर थाने के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन
पार्षदों को रोके जाने की सूचना मिलने के बाद कांग्रेस नेता और समर्थक पंचकूला के पिंजौर थाने के बाहर पहुंच गए। वहां नेताओं और पार्षदों के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए धरना दिया।
कांग्रेस ने पुलिस से पार्षदों को रोके जाने का आधार और उनकी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

कांग्रेस ने लगाया मतदान प्रभावित करने का आरोप
कांग्रेस नेता इमरान खान समेत पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्षदों को रोकने का उद्देश्य उन्हें तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव में मतदान से दूर रखना है। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम के पीछे तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ की भूमिका होने का भी आरोप लगाया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस की ओर से इन राजनीतिक आरोपों पर स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तिजारा में 35 पार्षद, 18 का आंकड़ा अहम
तिजारा नगर परिषद में कुल 35 पार्षद हैं। उपलब्ध चुनाव आंकड़ों के अनुसार 31 निर्दलीय, 3 भाजपा और 1 कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। सभापति का चुनाव पार्षदों के मतदान से होना है।
ऐसे में 18 पार्षदों को चुनाव से पहले रोके जाने का कांग्रेस का दावा स्थानीय सत्ता समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण बन गया है।
राजस्थान के नेता भी पहुंचे पंचकूला
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी घटनाक्रम को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकायों में बोर्ड गठन से पहले निर्वाचित पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह आरोप भी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
चुनाव से ठीक पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
तिजारा नगर परिषद के सभापति चुनाव से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और फिर हरियाणा में रोके जाने के आरोप ने चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। अब पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई का आधार, पार्षदों की स्थिति और मतदान में उनकी भागीदारी को लेकर तस्वीर स्पष्ट होना बाकी है।
