पंजाब की सियासत में खाकी का दबदबा, 2027 चुनाव में कौन सा पूर्व पुलिस अधिकारी उतरेगा मैदान में

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दल संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रहे हैं। इस बीच पूर्व पुलिस अधिकारियों के राजनीतिक सफर पर भी नजर है। कई खाकी वर्दी छोड़कर चुनावी मैदान में उतरे, कुछ विधायक और मंत्री बने तो कुछ को हार का सामना करना पड़ा।
पंजाब की सियासत से पुराना है खाकी का रिश्ता
पंजाब की राजनीति में पुलिस सेवा से राजनीति में आने वाले चेहरों की कहानी नई नहीं है। समय-समय पर पुलिस अधिकारी नौकरी छोड़कर या सेवानिवृत्ति के बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों का हिस्सा बनते रहे हैं। कुछ ने चुनाव जीतकर विधानसभा तक का सफर तय किया, जबकि कुछ हार के बावजूद सक्रिय राजनीति में बने रहे।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव करीब हैं तो चर्चा फिर तेज है कि क्या पंजाब पुलिस से कोई नया चेहरा राजनीति में दस्तक देगा या पार्टियां पुराने राजनीतिक चेहरों पर ही भरोसा जताएंगी?

मोहम्मद इजहार आलम से सिमरजीत सिंह मान तक
पूर्व DGP मोहम्मद इजहार आलम ने सेवानिवृत्ति के बाद 2009 में शिरोमणि अकाली दल का दामन थामा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 18 नवंबर 2009 को उन्हें पंजाब वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनाया था। उनकी पत्नी फरजाना निसारा खातून 2012 में मलेरकोटला से विधायक बनी थीं।
वहीं, पूर्व पुलिस अधिकारी सिमरजीत सिंह मान ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पुलिस सेवा से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) का गठन किया और तरनतारन तथा संगरूर से सांसद भी रहे।
परमदीप गिल और परगट सिंह का अलग सफर
पूर्व DGP परमदीप सिंह गिल ने SAD में शामिल होने के बाद 2012 में मोगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। उन्हें कांग्रेस के जोगिंदर पाल जैन ने हराया था। गिल को 57,575 वोट मिले थे, जबकि जैन के खाते में 62,200 वोट आए थे।
पूर्व SP और हॉकी खिलाड़ी परगट सिंह का राजनीतिक सफर इससे बिल्कुल अलग रहा। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 2012 में SAD के टिकट पर जालंधर कैंट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के जगबीर सिंह बराड़ को हराया।
2017 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की। इसके बाद वह पंजाब सरकार में खेल और शिक्षा मंत्री भी बने। 2022 में उन्होंने फिर जालंधर कैंट से जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई।
सज्जन चीमा और कुंवर विजय प्रताप सिंह
अर्जुन पुरस्कार विजेता बास्केटबॉल खिलाड़ी और पूर्व पुलिस अधिकारी सज्जन सिंह चीमा ने 2017 और 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर सुल्तानपुर लोधी से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों बार उन्हें हार मिली।
दूसरी ओर, पूर्व IG कुंवर विजय प्रताप सिंह ने अप्रैल 2021 में VRS लेकर राजनीति का रुख किया और AAP में शामिल हुए। 2022 में उन्होंने अमृतसर उत्तर सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। हालांकि, 2025 में पार्टी ने उन्हें कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पांच साल के लिए निलंबित कर दिया।
बलकार सिंह और फौजा सिंह सरारी
पूर्व DCP बलकार सिंह जनवरी 2021 में सेवानिवृत्त हुए और जून 2021 में AAP में शामिल हो गए। 2022 में उन्होंने करतारपुर सीट से चुनाव जीता और भगवंत मान सरकार में मंत्री बने। हालांकि, सितंबर 2024 में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया।
वहीं, पंजाब पुलिस में सब-इंस्पेक्टर रहे फौजा सिंह सरारी ने करीब 36 साल सेवा की। 2022 में AAP के टिकट पर गुरुहरसहाय से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे और मंत्री भी बने। बाद में विवाद के बीच 2023 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
2027 में खाकी से कौन आएगा?
पूर्व ADGP गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने अप्रैल 2024 में VRS लेकर कांग्रेस का दामन थामा था। हालांकि, उन्होंने अभी तक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। ऐसे में 2027 का चुनाव उनके लिए भी राजनीतिक संभावनाओं का दरवाजा खोल सकता है।
पंजाब की राजनीति में पुलिस अधिकारियों का अनुभव, प्रशासनिक पहचान और सार्वजनिक छवि कई दलों के लिए आकर्षण का कारण रही है। अब देखना होगा कि 2027 में पार्टियां इस अनुभव को कितनी अहमियत देती हैं और क्या एक बार फिर खाकी से कोई नया चेहरा पंजाब की चुनावी सियासत में अपनी किस्मत आजमाता है।
