अमित शाह के कथित रिश्तेदार को LPU हिंसा से जोड़ने वाला वीडियो निकला फर्जी, AI से बदली गई आवाज

फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो और भ्रामक दावों का सिलसिला सामने आया है। इसी बीच फगवाड़ा के SP मेजर सिंह की आवाज में एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें LPU हिंसा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कथित रिश्तेदार से जोड़ने का दावा किया गया। पंजाब पुलिस ने वीडियो को फर्जी बताते हुए कहा है कि इसे AI तकनीक की मदद से तैयार किया गया।
SP मेजर सिंह के नाम से वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में SP मेजर सिंह की आवाज में दावा किया गया कि LPU में शनिवार और रविवार को हुई हिंसा में अमित शाह के एक कथित रिश्तेदार की भूमिका है। वीडियो में यह भी कहा गया कि संबंधित व्यक्ति दिल्ली में छिपा हुआ है और उसकी तलाश के लिए पुलिस की एक टीम दिल्ली भेजी गई है।
वायरल क्लिप में अमित शाह के पंजाब दौरे और LPU के पास प्रस्तावित रैली का भी जिक्र किया गया। दावा किया गया कि रैली की तैयारियां LPU के संस्थापक अशोक मित्तल कर रहे हैं। इन दावों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
पंजाब पुलिस ने बताया AI डीपफेक
वीडियो वायरल होने के बाद पंजाब पुलिस ने इसकी वास्तविकता पर स्थिति स्पष्ट की। पुलिस के मुताबिक, वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्य एक वास्तविक वीडियो से लिए गए हैं, लेकिन SP की वास्तविक आवाज के स्थान पर AI की मदद से तैयार की गई सिंथेटिक आवाज इस्तेमाल की गई।
यानी वीडियो में दिखाई देने वाला अधिकारी वास्तविक है, लेकिन उसके नाम और आवाज का इस्तेमाल करके कथित तौर पर एक फर्जी बयान तैयार किया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो को बिना सत्यापन के आगे शेयर न करें।
3 मिनट 23 सेकंड के वीडियो से बनाया गया 18 सेकंड का क्लिप
जानकारी के मुताबिक, SP मेजर सिंह का मूल वीडियो करीब 3 मिनट 23 सेकंड का था। इसी वीडियो के लगभग 18 सेकंड के हिस्से को एडिट कर उसमें AI-generated आवाज जोड़ी गई और फिर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
मूल वीडियो में SP के पीछे फरहत नाम का एक युवक भी दिखाई देता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उस युवक को लेकर भी कई तरह के दावे किए जाने लगे। हालांकि, किसी व्यक्ति की केवल वीडियो में मौजूदगी के आधार पर उसकी भूमिका तय नहीं की जा सकती।

फरहत पर क्या आरोप लगाए जा रहे हैं?
फरहत को LPU का BBA छात्र और कश्मीर का रहने वाला बताया गया है। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि फरहत ने यूनिवर्सिटी की एक छात्रा से कथित रेप की अफवाह फैलाने में भूमिका निभाई। छात्रा का यह भी आरोप है कि उसने लोगों को भड़काया और बाद में बाहरी लोगों को बुलाया।
इसके अलावा उस पर हिंसा में शामिल होने के भी आरोप लगाए गए हैं। ये सभी आरोप फिलहाल जांच के दायरे में हैं और इन्हें अदालत या पुलिस की अंतिम पुष्टि के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
सोशल मीडिया वीडियो को लेकर भी जांच जरूरी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फरहत के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कुछ ऐसे वीडियो मिले हैं, जिनमें उसे कथित तौर पर प्रदर्शन और तोड़फोड़ के दौरान देखा जा सकता है। कुछ वीडियो में वह कथित रेप की अफवाह का जिक्र करते हुए कार्रवाई और न्याय की मांग करता नजर आता है।
हालांकि, इन वीडियो की पूरी पृष्ठभूमि, रिकॉर्डिंग का समय और उनकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। सोशल मीडिया पर मौजूद किसी वीडियो को अकेले घटना में किसी व्यक्ति की भूमिका का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फरहत ने आरोपों से किया इनकार
फरहत ने मंगलवार को सोशल मीडिया के जरिए अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों पर सफाई दी। उसका कहना है कि हिंसा के दौरान वह यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूद था, लेकिन कुछ देर बाद वहां से चला गया था। उसने हिंसा में शामिल होने के आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताया।
अब पुलिस की जांच में यह पता लगाया जाना है कि हिंसा के दौरान उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो का घटना से क्या संबंध है।
छात्रा ने CCTV फुटेज होने का दावा किया
वहीं, फरहत पर आरोप लगाने वाली छात्रा ने दावा किया है कि उसके पास CCTV फुटेज मौजूद हैं। छात्रा के मुताबिक, फुटेज से हिंसा और आगजनी से जुड़ी घटनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इन दावों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद ही हो सकेगी। LPU हिंसा की जांच के लिए पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) भी गठित किया है।
अफवाह से हिंसा और अब डीपफेक तक मामला
LPU में विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक छात्रा से कथित रेप की अफवाह से हुई थी। इसके बाद विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। कैंपस में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, पुलिस के साथ झड़प हुई और राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी यातायात प्रभावित हुआ।
अब इस पूरे मामले में AI डीपफेक वीडियो ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। किसी पुलिस अधिकारी की वास्तविक वीडियो फुटेज में AI-generated आवाज जोड़कर फर्जी बयान तैयार करना जांच के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सूचना की विश्वसनीयता के लिए भी गंभीर चुनौती है। पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि इस डीपफेक वीडियो को किसने तैयार किया, इसे किस उद्देश्य से फैलाया गया और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।
