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ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला, शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को लेकर कसा तंज

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव का जिक्र करते हुए सपा संगठन और परिवार के भीतर की स्थिति पर सवाल उठाए। राजभर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अब शिवपाल यादव को भी सपा कार्यालय जाने के लिए भतीजे की अनुमति का इंतजार करना पड़ता है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूपी में सपा-कांग्रेस गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं।

शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव का जिक्र

ओम प्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में शिवपाल यादव को ‘चच्चू’ कहकर संबोधित करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी कार्यालय में प्रवेश को लेकर उन्हें अखिलेश यादव की ‘हरी झंडी’ का इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने धर्मेंद्र यादव का भी जिक्र किया और कहा कि परिवार से जुड़े नेताओं की ऐसी स्थिति है तो दूसरे नेताओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

राजभर ने अपने पोस्ट में शिवपाल यादव के समाजवादी पार्टी के निर्माण और संगठन को मजबूत करने में उनके पुराने योगदान का भी उल्लेख किया। हालांकि, सपा की ओर से इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि शिवपाल यादव या धर्मेंद्र यादव को पार्टी कार्यालय में प्रवेश के लिए किसी विशेष अनुमति की आवश्यकता है। इसी तरह के दावे पर राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता रोहित अग्रवाल की टिप्पणी भी सामने आई थी।

राजनीतिक मतभेद के साथ व्यक्तिगत रिश्तों का भी जिक्र

राजभर ने अपने बयान में कहा कि शिवपाल यादव के साथ उनके राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी को खड़ा करने में उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने शिवपाल यादव के पुराने राजनीतिक सफर और मुलायम सिंह यादव के साथ संगठन विस्तार में उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए टिप्पणी की।

राजभर की यह टिप्पणी फिलहाल राजनीतिक बयान के रूप में सामने आई है। इसमें लगाए गए आरोपों को सपा की ओर से पुष्ट तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया गया है।

कांग्रेस पर भी साधा निशाना

ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का संदर्भ देते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस केंद्र में सत्ता में थी, लेकिन इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को बहुमत मिला।

राजभर ने इसी संदर्भ को मौजूदा चुनावी विवाद से जोड़ते हुए राहुल गांधी और अखिलेश यादव से सवाल किए। उनके बयान का यह हिस्सा उस व्यापक राजनीतिक विवाद के बीच आया है जिसमें कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप लगाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताया है।

ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश पर हमला, शिवपाल और धर्मेंद्र यादव को लेकर कसा तंज

SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। 25 सितंबर को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने लखनऊ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए, जबकि चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता।

इसी राजनीतिक माहौल में राजभर ने कांग्रेस के पुराने चुनावी प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए विपक्षी दलों के मौजूदा आरोपों पर सवाल उठाए हैं। उनके बयान को राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि चुनावी प्रक्रिया में किसी अनियमितता के स्वतंत्र प्रमाण के रूप में।

यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग भी मुद्दा

राजभर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि कांग्रेस 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी और अक्टूबर में सीट बंटवारे पर फैसला होने की उम्मीद है।

वहीं, सपा की ओर से इस संख्या पर अंतिम सहमति की घोषणा नहीं हुई है। दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा आने वाले दिनों में गठबंधन की चुनावी रणनीति का एक प्रमुख विषय बना रहेगा।

चुनाव से पहले बढ़ रही बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने संगठन और गठबंधन स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ रहे हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने अपने ताजा बयान में एक तरफ अखिलेश यादव और सपा के पारिवारिक-संगठनात्मक मुद्दों पर टिप्पणी की, तो दूसरी तरफ कांग्रेस और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर सवाल उठाए। इन बयानों पर संबंधित दलों की प्रतिक्रियाएं आने के बाद राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

ओम प्रकाश राजभर की टिप्पणी ने यूपी की राजनीति में सपा और कांग्रेस को लेकर चल रही बयानबाजी को और चर्चा में ला दिया है। शिवपाल यादव और धर्मेंद्र यादव को लेकर राजभर के दावे राजनीतिक टिप्पणी हैं, जबकि चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर अलग-अलग दलों के दावे और आयोग का पक्ष सामने आ चुका है।

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