
कर्नाटक में विधान परिषद की सात रिक्त सीटों के लिए गुरुवार को होने वाले चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने सभी 135 विधायकों के लिए विशेष मॉक वोटिंग सत्र आयोजित किया। पार्टी ने विधायकों को एक रिसॉर्ट में ठहराया हुआ है, जहां उन्हें चुनावी प्रक्रिया और मतदान के तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। इस अभ्यास सत्र में मुख्यमंत्री D. K. Shivakumar ने भी हिस्सा लिया। कांग्रेस के करीब 40 विधायक पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं, इसलिए उन्हें विशेष रूप से प्रेफरेंशियल वोटिंग प्रणाली समझाई गई।
7 सीटों के लिए 8 उम्मीदवार मैदान में
इस बार चुनाव दिलचस्प इसलिए हो गया है क्योंकि सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि बीजेपी और जेडीएस भी मुकाबले में हैं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस के चार और बीजेपी के दो उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। असली मुकाबला कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक और जेडीएस उम्मीदवार गोविंदराजू के बीच माना जा रहा है।
जीत के लिए चाहिए 28 विधायकों का समर्थन
कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए 28 विधायकों का समर्थन चाहिए। कांग्रेस को उम्मीद है कि उसके पास अपने पांचवें उम्मीदवार को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या है। यदि किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता (फर्स्ट प्रेफरेंस) के पर्याप्त वोट नहीं मिलते हैं, तो द्वितीय वरीयता (सेकंड प्रेफरेंस) वोटों की गिनती की जाती है। कांग्रेस का मानना है कि इस स्थिति में उसके उम्मीदवार को लाभ मिल सकता है।

क्रॉस वोटिंग का डर बना चुनौती
कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है कि कहीं कुछ विधायक विपक्षी उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान न कर दें। इसी वजह से सभी विधायकों को रिसॉर्ट में रखा गया है। मतदान के दिन सभी विधायक एक साथ बसों में विधानसभा पहुंचेंगे और मतदान करेंगे। पार्टी का लक्ष्य अपने विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की संभावना को समाप्त करना है।
तकनीकी गलती से बिगड़ सकता है गणित
कांग्रेस नेताओं ने विधायकों को यह भी समझाया है कि प्रेफरेंशियल वोटिंग में छोटी-सी तकनीकी गलती भी वोट को अमान्य बना सकती है। ऐसे में पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। मॉक वोटिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी विधायक सही तरीके से मतदान करें और पार्टी की चुनावी रणनीति को नुकसान न पहुंचे। अब सबकी नजर गुरुवार को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई है।