सोनीपत में बुजुर्ग शिवचरण गुप्ता की 13वीं समाज ने कराई, बेटियां नहीं पहुंचीं, सामाजिक संस्थाओं ने निभाई परिवार की जिम्मेदारी पूरी

सोनीपत में एक बुजुर्ग की 13वीं ने रिश्तों और बदलते सामाजिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। शिवचरण गुप्ता के अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि विसर्जन और 13वीं तक उनकी बेटियां दूर रहीं। ऐसे में समाजसेवियों और वृद्धाश्रम संचालकों ने परिवार बनकर सभी परंपराएं निभाईं।
समाज ने निभाई परिवार की जिम्मेदारी
सोनीपत के गीता मंदिर में बुजुर्ग शिवचरण राम रतन गुप्ता की 13वीं का आयोजन किया गया। परिवार के सदस्यों की गैरमौजूदगी के बीच वृद्धाश्रम संचालक, सामाजिक संस्थाओं के लोग और जनप्रतिनिधि इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए।
हवन-यज्ञ कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार जरूरी धार्मिक परंपराएं पूरी की गईं।
बेटियों ने पहले ही आने से कर दिया था इनकार
वृद्धाश्रम संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, शिवचरण गुप्ता के अंतिम संस्कार के दौरान बेटियों से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क हुआ था। अस्थि विसर्जन के समय भी व्हाट्सऐप के माध्यम से बातचीत हुई।

हालांकि, 13वीं के कार्यक्रम में शामिल होने से बेटियों ने पहले ही इनकार कर दिया था। इसके बाद समाज के लोगों ने आगे बढ़कर धार्मिक जिम्मेदारियां निभाईं।
परिवार की गैरमौजूदगी ने उठाए सवाल
13वीं जैसे महत्वपूर्ण संस्कार में परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इस वजह से कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भावनात्मक माहौल रहा।
समाजसेवियों का कहना है कि किसी व्यक्ति के जीवन के अंतिम पड़ाव पर परिवार और समाज का साथ बेहद महत्वपूर्ण होता है। शिवचरण गुप्ता के मामले में सामाजिक संस्थाओं ने यह जिम्मेदारी निभाकर एक अलग उदाहरण पेश किया।
वृद्धाश्रम संचालक ने दिया बड़ा संदेश
आनंद कुमार ने कहा कि आज कई बुजुर्ग अपने ही बच्चों की उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास अक्सर ऐसे फोन आते हैं, जिनमें बुजुर्ग अपने बच्चों द्वारा परेशान किए जाने या अकेले छोड़ दिए जाने की शिकायत करते हैं।
उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा करना संतान का कर्तव्य है। साथ ही बच्चों को बचपन से ही ऐसे संस्कार देना जरूरी है, जिससे वे भविष्य में अपने माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करें।
समाजसेवियों ने जताई चिंता
कार्यक्रम में पहुंची समाजसेविका सुमन मंजरी ने कहा कि बदलते सामाजिक माहौल में संस्कारों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।
उन्होंने शिवचरण गुप्ता के मामले को समाज के लिए एक सीख बताया और कहा कि माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि भावनात्मक साथ भी उतना ही जरूरी है।
जनप्रतिनिधियों ने भी दी श्रद्धांजलि
शिवचरण गुप्ता की 13वीं में सोनीपत के मेयर राजीव जैन सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि पहुंचे। सभी ने दिवंगत को श्रद्धांजलि दी और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि समाज तभी मजबूत बनता है, जब मुश्किल समय में लोग एक-दूसरे के साथ खड़े हों। परिवार की अनुपस्थिति में समाज का आगे आना इसी भावना को दर्शाता है।
बुजुर्गों के सम्मान का सवाल
शिवचरण गुप्ता की 13वीं का यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं रहा। इसने बुजुर्गों की देखभाल, पारिवारिक जिम्मेदारी और बदलते सामाजिक रिश्तों पर भी बहस छेड़ दी है।
रिश्तों की असली परीक्षा अक्सर जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर होती है। शिवचरण गुप्ता की 13वीं में समाज ने जो जिम्मेदारी निभाई, वह एक तरफ मानवीय संवेदना की मिसाल है, तो दूसरी तरफ यह सोचने का अवसर भी देती है कि बुजुर्गों को अपने ही परिवार में सम्मान और अपनापन क्यों न मिले।
