
दिल्ली से सटे गुरुग्राम के सेक्टर-37C स्थित इम्पीरिया एस्फेरा सोसाइटी में गुरुवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। टावर-ई के एक फ्लैट की बालकनी का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे के समय नीचे कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। घटना के बाद पूरी सोसाइटी में दहशत फैल गई और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। बालकनी के साथ फ्लैट की बाहरी दीवार का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।
बिल्डर पर घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने का आरोप
घटना के बाद सोसाइटी के निवासियों ने बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि निर्माण के दौरान निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसकी वजह से अब लोगों की सुरक्षा खतरे में है। रेजिडेंट्स का दावा है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि पहले भी इस तरह की समस्याएं सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च कर फ्लैट खरीदने के बावजूद उन्हें सुरक्षित आवास नहीं मिल पा रहा है।

थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल ऑडिट की मांग
निवासियों ने पूरे प्रोजेक्ट की स्वतंत्र एजेंसी से स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक सभी टावरों की तकनीकी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। उनका मानना है कि यदि समय रहते व्यापक जांच नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासनिक निगरानी और बिल्डर की जवाबदेही पर सवाल
गुरुग्राम में इससे पहले भी कई हाईराइज सोसाइटियों में प्लास्टर गिरने और संरचनात्मक खामियों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन मामलों के बाद प्रशासन ने कई परियोजनाओं के स्ट्रक्चरल ऑडिट के निर्देश दिए थे। इम्पीरिया एस्फेरा की इस ताजा घटना ने एक बार फिर बिल्डरों की जवाबदेही, निर्माण गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस ने प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
