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प्रशांत किशोर के नामांकन में आ सकते हैं विजय थलपति, बांकीपुर में बढ़ी हलचल

बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ा दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर पहली बार खुद चुनाव मैदान में उतरे हैं। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं और मतदाताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। इसी बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय थलपति उनके नामांकन कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक इस संबंध में जन सुराज या विजय थलपति की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

विजय थलपति के आने की चर्चा क्यों?

विजय थलपति के बिहार आने की अटकलों के पीछे प्रशांत किशोर और उनके पुराने राजनीतिक संबंधों को अहम वजह माना जा रहा है। वर्ष 2025 में प्रशांत किशोर तमिलनाडु में विजय थलपति की पार्टी के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उन्हें राज्य की राजनीति में नई उम्मीद बताया था। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय थलपति की चुनावी रणनीति तैयार करने में प्रशांत किशोर की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसी कारण अब यह चर्चा है कि विजय थलपति भी प्रशांत किशोर के समर्थन में बांकीपुर पहुंच सकते हैं।

प्रशांत किशोर के नामांकन में आ सकते हैं विजय थलपति, बांकीपुर में बढ़ी हलचल

13 जुलाई को नामांकन, प्रचार पर टिकी नजर

प्रशांत किशोर 13 जुलाई को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। इससे पहले वह लगातार बांकीपुर क्षेत्र में जनसभाएं और पदयात्राएं कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी सीधी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी से है और मतदाताओं को “अहंकार की राजनीति” के खिलाफ मतदान करना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा, राजद और अन्य दल भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिससे यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विजय थलपति वास्तव में बांकीपुर पहुंचकर प्रशांत किशोर के समर्थन में प्रचार करते हैं तो इसका मनोवैज्ञानिक और प्रचारात्मक असर जरूर दिखाई दे सकता है। हालांकि चुनावी नतीजों पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा। फिलहाल विजय थलपति के संभावित दौरे की चर्चा ने बांकीपुर उपचुनाव को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है और सभी की निगाहें 13 जुलाई के नामांकन कार्यक्रम पर टिकी हैं।

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