राजनीतिराज्य

अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी का सुभासपा में शामिल होना बना बड़ा सियासी विवाद

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में चर्चित अजीत सिंह हत्याकांड से जुड़े आरोपी प्रदीप सिंह कबूतरा के सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी में शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. यह कदम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सुभासपा एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और इसी कारण इस फैसले पर राजनीतिक सवाल उठने लगे हैं. विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लेकर सरकार और सुभासपा नेतृत्व पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. राजनीतिक गलियारों में इस जॉइनिंग को एक बड़े विवाद के रूप में देखा जा रहा है.

अजीत सिंह हत्याकांड और जांच में सामने आया नाम

यह मामला 6 जनवरी 2021 का है जब लखनऊ के विभूति खंड इलाके में ब्लॉक प्रमुख पति अजीत सिंह की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था. जांच के दौरान प्रदीप सिंह कबूतरा का नाम सामने आया था और उस पर शूटरों को मदद और शरण देने के गंभीर आरोप लगे थे. इसके साथ ही जांच में उसका संबंध कासगंज जेल में बंद गैंगस्टर ध्रुव सिंह कुटू और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े शार्प शूटरों के साथ भी जोड़ा गया. इस केस में कई बड़े नामों के सामने आने से मामला और जटिल हो गया था.

अजीत सिंह हत्याकांड के आरोपी का सुभासपा में शामिल होना बना बड़ा सियासी विवाद

गिरफ्तारी सरेंडर और जेल से रिहाई तक का सफर

पुलिस के दबाव के बाद प्रदीप सिंह कबूतरा ने अप्रैल 2021 में आजमगढ़ में सरेंडर कर दिया था. इसके बाद उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया जहां वह काफी समय तक बंद रहा. जेल में रहने के दौरान भी यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा. बाद में जमानत या रिहाई के बाद अब उसने राजनीति में कदम रखते हुए सुभासपा का दामन थाम लिया है. उसके साथ संजीव सिंह बंटू के भी पार्टी में शामिल होने की खबर है जिससे संगठन में नई हलचल पैदा हो गई है.

सुभासपा जॉइनिंग से बढ़ा सियासी तनाव और विपक्ष का हमला

प्रदीप सिंह कबूतरा के सुभासपा में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है. विपक्षी दलों खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार और एनडीए गठबंधन पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि ऐसे मामलों से राजनीतिक संदेश गलत जाता है और कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं. वहीं सुभासपा की ओर से अभी इस विवाद पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है. इस घटनाक्रम के बाद यूपी की राजनीति में सियासी तनाव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

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