
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस पदयात्रा पर अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार करते हुए बीजेपी पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष के विरोध के खिलाफ यह पदयात्रा निकाली। इस यात्रा का नेतृत्व योगी आदित्यनाथ ने किया, जिसमें डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक समेत कई एनडीए नेता शामिल हुए। बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और संगठनों की भागीदारी ने इसे राजनीतिक रूप से अहम बना दिया।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि “एक नहीं, बार-बार झूठ बोलो” का पाठ पढ़ाया जा रहा है और जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। उनके इस बयान के बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।
बीजेपी का दावा है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर बाधा डालकर अपना “महिला विरोधी चेहरा” उजागर कर दिया है। पार्टी के अनुसार, यह पदयात्रा जनता को सच बताने और विपक्ष के रुख को उजागर करने के लिए निकाली गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह यात्रा मुख्यमंत्री आवास से विधानभवन तक निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण विधेयक के पीछे सरकार की मंशा साफ नहीं है। उनका आरोप है कि इसे परिसीमन से जोड़कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए विरोध जताया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए विशेष सत्र बुलाकर विधेयक पेश किया था, लेकिन इसे लेकर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद से ही यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे। महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ नीति नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का भी अहम हिस्सा बन चुका है।