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सुप्रीम कोर्ट में AI की एंट्री, CJI ने बताया विजन

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया भर में कामकाज के तरीके बदल रहा है। अब इसकी दस्तक भारत की न्यायपालिका में भी सुनाई देने लगी है। हालांकि, देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने साफ कर दिया है कि AI का उद्देश्य न्यायाधीशों की जगह लेना नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाना है।
न्यायपालिका में तकनीक की बढ़ती भूमिका

ऑक्सफोर्ड यूनियन और ऑक्सफोर्ड लॉ सोसाइटी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हमेशा तकनीक को मानव निर्णय क्षमता का सहयोगी मानता है। न्यायाधीशों की स्वतंत्र सोच, संवैधानिक समझ और मानवीय दृष्टिकोण का कोई तकनीकी विकल्प नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग न्यायिक कार्यों को तेज, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए किया जाएगा।

स्वदेशी AI सिस्टम पर हो रहा काम

प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि भारतीय न्यायपालिका के लिए एक स्वदेशी AI प्रणाली विकसित करने की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। यह प्रणाली भारत की संवैधानिक भावना, सामाजिक वास्तविकताओं, भाषाई विविधता और न्यायिक परंपराओं को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी।

उनका मानना है कि विदेशी तकनीकी मॉडल भारतीय परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं समझ सकते, इसलिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करना आवश्यक है।

AI देगा मदद, फैसला इंसान करेगा

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि AI कानूनी शोध, दस्तावेजों के विश्लेषण, केस मैनेजमेंट और डेटा प्रोसेसिंग जैसे कार्यों में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश ही लेंगे।

उन्होंने कहा कि न्याय केवल कानून की व्याख्या नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और परिस्थितियों को समझने की प्रक्रिया भी है।

युवा पेशेवर बन रहे बदलाव के वाहक

प्रधान न्यायाधीश ने युवा वकीलों, न्यायिक अधिकारियों और कानूनी पेशेवरों की भी सराहना की। उनके अनुसार, नई पीढ़ी तकनीक को तेजी से अपनाकर न्यायपालिका में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

युवा पेशेवर डिजिटल न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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