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फायरिंग केस में दोषी करार राजू सिंह, क्या जाएगी विधायकी?

बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब साहेबगंज से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह को दिल्ली की अदालत ने एक चर्चित फायरिंग मामले में दोषी ठहरा दिया। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत उन्हें कितनी सजा सुनाती है और इसका उनके राजनीतिक भविष्य पर क्या असर पड़ सकता है।
आठ साल पुराने मामले में आया बड़ा फैसला

मामला वर्ष 2018 के न्यू ईयर सेलिब्रेशन से जुड़ा है। आरोप है कि दक्षिण दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित फार्महाउस में आयोजित पार्टी के दौरान हुई फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी करार दिया है।

अदालत ने उन्हें हिरासत में लेने का आदेश भी दिया है, जबकि अन्य सह-आरोपियों को राहत मिली है।

किन धाराओं में दोषी ठहराए गए?

कोर्ट ने राजू सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-II) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत दोषी माना है। यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां किसी व्यक्ति को अपने कृत्य के संभावित परिणाम का अंदाजा होता है, लेकिन हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता।

अब अदालत सजा की अवधि तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी।

क्या जा सकती है विधायकी?

राजनीतिक दृष्टि से सबसे बड़ा सवाल यही है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुसार यदि किसी विधायक या सांसद को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है।

यानी अदालत का अंतिम फैसला राजू सिंह के राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम साबित होगा।

हाई कोर्ट में अपील का विकल्प

कानून के तहत दोषी व्यक्ति को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार होता है। हालांकि केवल अपील दाखिल करने से सदस्यता स्वतः सुरक्षित नहीं रहती। यदि उच्च न्यायालय सजा या दोषसिद्धि पर रोक देता है, तभी स्थिति बदल सकती है।

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