
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर चर्चा में है। RSS से जुड़े स्कूल में पढ़ाई के सवाल से शुरू हुई बातचीत में उन्होंने अपने बचपन, संघ की भूमिका, देशभक्ति और Gen-Z की राजनीति पर खुलकर अपनी राय रखी।
RSS स्कूल में पढ़ाई पर क्या बोले संजय सिंह?
AAP नेता संजय सिंह से ब्लॉगर अर्श नवाज ने उनके स्कूली जीवन को लेकर सवाल किया। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने RSS के स्कूल में पढ़ाई की थी, तो संजय सिंह ने कहा कि इसमें दिक्कत क्या है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस शिशु मंदिर में उन्होंने पढ़ाई की, उसमें उनके साथ मुस्लिम बच्चे भी पढ़ते थे। उन्होंने अपने क्लासफेलो के रूप में आबाद अहमद का नाम भी लिया।
संजय सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति ने कहां से पढ़ाई की, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि वह आज किन मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहा है।
RSS की भूमिका पर लगाए गंभीर आरोप
बातचीत के दौरान संजय सिंह ने RSS की ऐतिहासिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता आंदोलन में RSS की कोई भूमिका नहीं थी और संगठन ने अंग्रेजों का साथ दिया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि RSS नेताओं ने जिन्ना की मुस्लिम लीग के साथ मिलकर कुछ राज्यों में सरकार बनाई थी और लंबे समय तक तिरंगा नहीं फहराया था।

हालांकि, ये संजय सिंह के राजनीतिक दावे हैं और इनके ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और ऐतिहासिक मत मौजूद हैं। ऐसे दावों को तथ्य के रूप में स्वीकार करने से पहले स्वतंत्र ऐतिहासिक स्रोतों से जांच जरूरी है।
‘RSS से देशभक्ति का प्रमाणपत्र नहीं चाहिए’
संजय सिंह ने RSS को लेकर अपने बयान में राष्ट्रगान और तिरंगे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि संगठन ने 1949 में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के विरोध में लेख प्रकाशित किया था।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राष्ट्रगान और तिरंगे का विरोध किया, उनसे किसी को देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने RSS पर नफरत फैलाने का आरोप भी लगाया।
उनके इन बयानों ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है।
Gen-Z को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना
इंटरव्यू में जब उनसे Gen-Z को आकर्षित करने की राजनीति पर सवाल पूछा गया तो संजय सिंह ने युवाओं को सावधान रहने की सलाह दी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं को केवल नारों और प्रचार के आधार पर नेताओं का आकलन नहीं करना चाहिए। उन्होंने रोजगार और पेपर लीक जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
संजय सिंह ने Gen-Z के साथ-साथ Gen Alpha का भी उल्लेख किया और कहा कि नई पीढ़ी अब राजनीतिक सवालों को लेकर जागरूक हो रही है।
शिशु मंदिर और RSS का संबंध क्या है?
सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या भारती का RSS से वैचारिक संबंध लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पहला सरस्वती शिशु मंदिर 1952 में गोरखपुर में शुरू हुआ था और बाद में विद्या भारती का देशभर में बड़ा शैक्षणिक नेटवर्क विकसित हुआ।
कुछ स्कूल स्वयं भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति और नैतिक शिक्षा को अपने शैक्षणिक उद्देश्यों का हिस्सा बताते हैं। वहीं विद्या भारती से जुड़े प्रतिनिधि यह कहते रहे हैं कि स्कूलों का उद्देश्य शिक्षा और चरित्र निर्माण है, न कि किसी राजनीतिक दल के लिए काम करना।
राजनीतिक बयान से फिर गरमाई बहस
संजय सिंह का यह इंटरव्यू ऐसे समय चर्चा में आया है जब देश में RSS की भूमिका, शिक्षा और राष्ट्रवाद को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। उनके बयान ने एक साथ कई मुद्दों को छू दिया—स्कूली शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास, देशभक्ति की परिभाषा और युवाओं की राजनीति।
सवाल सिर्फ यह नहीं है कि संजय सिंह ने RSS के स्कूल में पढ़ाई की या नहीं। असली राजनीतिक बहस यह है कि किसी नेता के अतीत की तुलना उसके वर्तमान विचारों से कैसे की जाए और नई पीढ़ी राजनीतिक दावों को कितनी गंभीरता से परखती है।