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यूपी में श्रमिकों के वेतन तय करने की तैयारी, वेज बोर्ड बनाएगा नई मजदूरी व्यवस्था

उत्तर प्रदेश में श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार नई मजदूरी नियमावली लागू करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित ‘मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ को जल्द अंतिम रूप देकर मई से लागू करने की तैयारी है। इसके साथ ही एक वेज बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन तय करेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत वेतन निर्धारण भौगोलिक परिस्थितियों और जीवन-यापन की लागत के आधार पर किया जाएगा। यानी अलग-अलग क्षेत्रों में रहने की लागत को ध्यान में रखते हुए मजदूरी तय होगी, जिससे श्रमिकों को अधिक न्यायसंगत भुगतान मिल सके।
‘जागरण विमर्श’ कार्यक्रम में डॉ. एमके शन्मुगा सुन्दरम और मार्कण्डेय शाही ने वर्चुअल रूप से भाग लेते हुए इस नई नीति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य उद्योगों और श्रमिकों दोनों के हितों में संतुलन बनाना है, ताकि विकास के साथ-साथ श्रमिकों का जीवन स्तर भी बेहतर हो सके।

सरकार ने फिलहाल अंतरिम राहत देते हुए 1 अप्रैल से न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि कर दी है। खास बात यह है कि पहली बार प्रदेश को तीन श्रेणियों में विभाजित कर अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। आगे भी इसी आधार पर वेतन निर्धारण किया जाएगा।
अब तक मजदूरी दरें वर्ष 2012 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित थीं, लेकिन नई व्यवस्था में दिसंबर 2025 के 425 अंकों के औसत सूचकांक को आधार बनाया गया है। इससे मजदूरी दरों में वास्तविक जीवन-यापन की लागत का बेहतर प्रतिबिंब मिलेगा।
नई नियमावली मजदूरी संहिता 2019 के तहत लागू की जा रही है। इस पर 23 अप्रैल तक आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं, जिन पर विचार करने के बाद कैबिनेट की मंजूरी के पश्चात इसे लागू किया जाएगा।

इसके अलावा श्रमिकों के लिए आवास और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के माध्यम से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में लेबर हॉस्टल बनाए जाएंगे, ताकि श्रमिकों को सस्ती दरों पर आवास मिल सके।

स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा ग्रेटर नोएडा में 500 बेड का अस्पताल भी बनाया जा रहा है। इन परियोजनाओं को पूरा होने में लगभग 18 महीने का समय लगेगा।

सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से न केवल श्रमिकों की जीवन गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।

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