मनोहर लाल की बड़ी घोषणा एक लाख करोड़ से चार लाख करोड़ निवेश

केंद्रीय ऊर्जा, शहरी विकास एवं आवासन मंत्री मनोहर लाल ने देश के शहरी विकास को नई गति देने के लिए शहरी चुनौती कोष (अर्बन चैलेंज फंड) और क्रेडिट रिपमेंट गारंटी सब-स्कीम (सीआरजीएसएस) की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। कार्यक्रम में कई राज्यों के मुख्यमंत्री और प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया, जिससे इसे राष्ट्रीय स्तर की बड़ी पहल माना जा रहा है।
एक लाख करोड़ के फंड से चार लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य
इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये के शहरी चुनौती कोष के साथ लगभग चार लाख करोड़ रुपये तक के निवेश का रोडमैप तैयार किया है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह फंड शहरों के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव लाएगा। नगर निकायों को अब म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के जरिए संसाधन जुटाने का अवसर मिलेगा, जिससे शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।

छोटे शहरों को मिलेगा क्रेडिट गारंटी का सहारा
सीआरजीएसएस यानी क्रेडिट रिपमेंट गारंटी सब-स्कीम के जरिए छोटे और मध्यम शहरों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इस व्यवस्था से छोटे शहर भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भागीदारी कर सकेंगे। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि नगर निकायों को केवल अनुदान पर निर्भर न रहना पड़े, बल्कि वे आत्मनिर्भर वित्तीय मॉडल की ओर बढ़ें। कुल बजट में से बड़ी राशि परियोजनाओं, क्षमता निर्माण और क्रेडिट गारंटी के लिए निर्धारित की गई है।
विकसित भारत 2047 की दिशा में बड़ा कदम
मनोहर लाल ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश के शहर मजबूत आर्थिक केंद्र बनेंगे। इस योजना में केंद्रीय सहायता परियोजना लागत का अधिकतम 25 प्रतिशत तक सीमित होगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत फंड बाजार आधारित स्रोतों से जुटाना होगा। इससे वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा और निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा। यह फंड पुराने शहरों के पुनर्विकास, शहरी परिवहन, स्वच्छता, जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूल विकास जैसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देगा, जिससे भारतीय शहरों का चेहरा बदलने की उम्मीद है।
