
आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद Raghav Chadha का पहला वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने फैसले को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उन्हें ढेरों संदेश मिले, जिनमें कुछ लोगों ने बधाई दी तो कई लोगों ने उनके इस बड़े राजनीतिक कदम के पीछे की वजह जाननी चाही। चड्ढा ने साफ कहा कि यह फैसला अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से पार्टी के भीतर चल रही परिस्थितियों का परिणाम था। उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक या दो लोग पार्टी छोड़ते तो सवाल उठता, लेकिन सात सांसदों का एक साथ जाना अपने आप में बहुत कुछ बताता है।
‘पार्टी का माहौल बिगड़ चुका था’, केजरीवाल पर इशारा
चड्ढा ने बिना नाम लिए Arvind Kejriwal के नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के अंदर का माहौल पहले जैसा नहीं रहा और नेताओं को काम करने से रोका जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में भी नेताओं को अपनी बात रखने की पूरी आजादी नहीं दी जाती थी। उनके अनुसार, पार्टी अब कुछ सीमित लोगों के नियंत्रण में आ गई है, जहां फैसले पारदर्शिता के बजाय निजी हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और AAP की आंतरिक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘15 साल की मेहनत के बाद लिया कठिन फैसला’
राघव चड्ढा ने बताया कि उन्होंने एक सफल चार्टर्ड अकाउंटेंट का करियर छोड़कर राजनीति में कदम रखा था और आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि पार्टी को खड़ा करने में उन्होंने अपनी जवानी के 15 साल दिए और पूरी निष्ठा के साथ काम किया। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलती गईं और उन्हें महसूस हुआ कि वह ‘गलत पार्टी में सही व्यक्ति’ बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि उनके सामने तीन रास्ते थे—राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर रहकर संघर्ष करना या किसी नए मंच पर जाकर सकारात्मक राजनीति जारी रखना। अंततः उन्होंने तीसरा रास्ता चुना।
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नए मंच पर ‘सकारात्मक राजनीति’ का वादा
चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अकेले नहीं बल्कि छह अन्य सांसदों के साथ मिलकर यह फैसला लिया और अब वे Bharatiya Janata Party के साथ मिलकर जनता के मुद्दों को और मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि नए मंच पर उन्हें ज्यादा स्वतंत्रता और अवसर मिलेगा, जिससे वे आम लोगों की समस्याओं का बेहतर समाधान निकाल सकेंगे। उनके साथ पार्टी छोड़ने वालों में संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, स्वाति मालीवाल और विक्रमजीत साहनी शामिल हैं। चड्ढा ने कहा कि जब किसी संगठन में काम करने की आजादी खत्म हो जाती है, तो वहां बने रहना सही नहीं होता।
