राजनीतिराज्य

बस्ती की करोड़ों की इथेनॉल फैक्ट्री पर सियासत तेज, ग्रामीणों ने निर्माण रोकने की मांग

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इथेनॉल फैक्ट्री को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। भानपुर तहसील के ग्राम दसिया (थाना रुधौली) में निर्माणाधीन अनीता डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड के इथेनॉल प्लांट का स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया है। खास बात यह है कि इस मुद्दे पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं के बीच भी अलग-अलग राय देखने को मिली। ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए निर्माण कार्य तत्काल रोकने की मांग की है।

कंपनी का दावा- पर्यावरण अनुकूल और रोजगार देने वाली परियोजना

कंपनी प्रबंधन का कहना है कि परियोजना पूरी तरह पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप विकसित की जा रही है। निदेशक रोहन जायसवाल के अनुसार प्लांट का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अक्टूबर 2026 तक उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कंपनी का दावा है कि प्लांट में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे अशोधित पानी बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। साथ ही सभी आवश्यक एनओसी और सरकारी अनुमतियां भी प्राप्त की जा चुकी हैं। कंपनी का आरोप है कि कुछ लोग बिना तथ्यों के राजनीतिक कारणों से भ्रम फैला रहे हैं।

बस्ती की करोड़ों की इथेनॉल फैक्ट्री पर सियासत तेज, ग्रामीणों ने निर्माण रोकने की मांग

ग्रामीणों ने पर्यावरण और बच्चों की सुरक्षा पर जताई चिंता

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री से आसपास के 15 गांवों के जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं। उनका आरोप है कि प्लांट से महज करीब 200 मीटर की दूरी पर सरकारी स्कूल मौजूद हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य पर खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने पूरे प्रोजेक्ट की निष्पक्ष जांच कराए जाने और निर्माण कार्य रोकने की मांग की है। जिला प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

नेताओं ने भी उठाए सवाल, जांच की मांग

समाजवादी पार्टी के सांसद राम प्रसाद चौधरी ने कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और किसानों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सपा विधायक कविंद्र चौधरी ने भी ग्रामीणों के समर्थन में खड़े होने की बात कही। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का उल्लंघन या किसानों एवं ग्रामीणों के हितों को नुकसान पहुंचने के प्रमाण मिले, तो इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। अब यह मामला केवल औद्योगिक परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण, जनहित और राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button