
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से प्रदेश नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों पर पार्टी ने विराम लगा दिया है। कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व में बदलाव कोई हल्का फैसला नहीं होता और आलाकमान के निर्णय को बदला नहीं जाएगा।
भूपेश बघेल ने क्या कहा?
चंडीगढ़ में पार्टी नेताओं के साथ बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि “प्रदेश अध्यक्ष बदलना कोई गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं है। कांग्रेस में आलाकमान के फैसले वापस लेने की परंपरा नहीं है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहेंगे।
बघेल के अनुसार, जिला कांग्रेस अध्यक्षों और प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के सदस्यों ने सर्वसम्मति से पार्टी नेतृत्व के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने पार्टी के तीनों कार्यकारी अध्यक्षों को भी शुभकामनाएं दीं।
चन्नी और रंधावा से होगी मुलाकात
भूपेश बघेल ने बताया कि उनकी पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा से बातचीत हो चुकी है और जल्द ही उनसे मुलाकात भी होगी। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वह स्वयं उनके घर जाकर चाय पर चर्चा करेंगे। उनका कहना था कि पार्टी का उद्देश्य सभी नेताओं को साथ लेकर संगठन को मजबूत करना है।

संगठन में एकजुटता की कोशिश
पंजाब कांग्रेस में हाल के दिनों में संगठनात्मक नियुक्तियों और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग मत सामने आए थे। कुछ नेताओं द्वारा चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने की मांग भी की गई थी। इसी पृष्ठभूमि में भूपेश बघेल पांच दिवसीय दौरे पर पंजाब पहुंचे हैं और लगातार पार्टी नेताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं, ताकि संगठन में एकजुटता का संदेश दिया जा सके।
2027 विधानसभा चुनाव पर फोकस
पंजाब में वर्ष 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व संगठन को चुनावी मोड में लाने और सभी गुटों के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने हाल ही में चुनाव की तैयारियों के लिए विभिन्न समितियों की भी घोषणा की है, जिससे संगठनात्मक गतिविधियों को गति मिल सके।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर विराम
भूपेश बघेल के ताजा बयान के बाद फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष बदलने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, पार्टी के भीतर सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ संवाद जारी रहेगा ताकि आगामी चुनावों से पहले संगठन को पूरी तरह एकजुट किया जा सके।
