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‘शीश महल’ से स्टेट गेस्ट हाउस तक! केजरीवाल के पुराने आवास को नया रूप देने की तैयारी, सांस्कृतिक केंद्र भी बनेगा

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का सिविल लाइंस स्थित पुराना आधिकारिक आवास एक बार फिर सुर्खियों में है। राजनीतिक विवादों के दौरान ‘शीश महल’ के नाम से चर्चित इस बंगले को अब राज्य अतिथि गृह और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह परिसर प्रशासनिक उपयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है।

स्टेट गेस्ट हाउस बनाने की तैयारी

दिल्ली सरकार के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, 6, फ्लैगस्टाफ रोड, सिविल लाइंस स्थित इस बंगले के पुनः उपयोग को लेकर प्रारंभिक योजना तैयार की गई है। प्रस्ताव के तहत यहां अन्य राज्यों के भवनों की तर्ज पर एक आधुनिक स्टेट गेस्ट हाउस बनाया जाएगा, जहां विभिन्न राज्यों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी प्रतिनिधिमंडल ठहर सकेंगे। इसके लिए निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा।

सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी होगा उपयोग

योजना के अनुसार, मौजूदा परिसर और उससे सटी नई इमारत को मिलाकर एक बड़ा कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। इसमें आधुनिक सम्मेलन हॉल, बैठक कक्ष और अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाए जाने का प्रस्ताव है। यहां कला प्रदर्शनियां, साहित्यिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और सरकारी सम्मेलन आयोजित किए जा सकेंगे।

'शीश महल' से स्टेट गेस्ट हाउस तक! केजरीवाल के पुराने आवास को नया रूप देने की तैयारी, सांस्कृतिक केंद्र भी बनेगा

आम लोगों के लिए भी होंगी सुविधाएं

प्रस्तावित परियोजना में आगंतुकों के लिए विशाल पार्किंग, आधुनिक प्रतीक्षालय और सार्वजनिक कैफेटेरिया विकसित करने की भी योजना है। कैफेटेरिया में दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक व्यंजन उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक भी इस परिसर का लाभ उठा सकें।

दिल्ली को मिलेगा अपना समर्पित स्टेट भवन

दिल्ली के पास फिलहाल ऐसा कोई समर्पित स्टेट गेस्ट हाउस नहीं है, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों को ठहराया जा सके। लंबे समय से खाली पड़े इस सरकारी आवास का रखरखाव अब भी नियमित रूप से किया जा रहा है और इसके लिए कर्मचारियों की तैनाती जारी है।

रेनोवेशन को लेकर पहले भी रहा विवाद

मुख्यमंत्री रहते अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में इस बंगले के नवीनीकरण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। विपक्ष ने निर्माण लागत और कथित फिजूलखर्ची को लेकर सवाल उठाए थे। इसी मामले में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही है। इन जांचों के अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी हैं।

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