
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा आयोजित “इंडिया से भारत: एक प्रवास” पुस्तक के विमोचन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को नई पहचान देने के लिए कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इस कार्यक्रम में राज्य के कई मंत्री और वरिष्ठ गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। पुस्तक का विमोचन एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और वैचारिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी सरकार के कार्यों की सराहना और ऐतिहासिक संदर्भ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 से लेकर अब तक के समय को भारत के लिए स्वर्णिम काल कहा जा सकता है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह न्याय व्यवस्था के निर्णय से संभव हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे मातरम् की गरिमा को पुनर्स्थापित किया गया और कोरोना महामारी के दौरान भारत ने न केवल अपने नागरिकों बल्कि अन्य देशों को भी सहयोग देकर वैश्विक मैत्री का उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके अनुसार इन सभी प्रयासों से भारत की वैश्विक छवि और मजबूत हुई है।

पुस्तक विमोचन और वैचारिक संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता टीवी9 भारतवर्ष के निदेशक हेमंत शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि देश को “इंडिया से भारत” बनाने की दिशा में मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जैसे नेता इस परिवर्तन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और राम पथ तथा कृष्ण पाथेय जैसे सांस्कृतिक प्रोजेक्ट भारत की प्राचीन विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास हैं। यह आयोजन केवल पुस्तक विमोचन नहीं बल्कि एक वैचारिक संदेश देने वाला मंच भी माना गया।
लेखक प्रशांत पोल का दृष्टिकोण और ऐतिहासिक संदर्भ
पुस्तक के लेखक प्रशांत पोल ने कहा कि उन्होंने 11 अध्यायों के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया है कि भारत कभी कमजोर या दीन-हीन नहीं रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वतंत्रता के बाद से भारत ने कई राजनीतिक और सामाजिक बदलाव देखे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक काल में पिछले एक दशक में देश में बड़े परिवर्तन हुए हैं। कार्यक्रम में कई विद्वानों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी पुस्तक के विचारों पर अपने विचार रखे और भारत की सांस्कृतिक पहचान पर जोर दिया। इस पूरे आयोजन ने राजनीतिक और वैचारिक दोनों स्तरों पर चर्चा को नई दिशा दी है।
