दुष्यंत चौटाला विवाद में नया मोड़ सीबीआई जांच की मांग से मचा सियासी भूचाल

हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और पुलिस के बीच चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। दुष्यंत चौटाला ने अदालत से एफआईआर दर्ज करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में हरियाणा पुलिस पर भरोसा करना मुश्किल है, इसलिए जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जानी चाहिए।
हिसार में काफिले को रोकने और धमकी का गंभीर आरोप
याचिका के अनुसार यह पूरा मामला 17 अप्रैल 2026 को हिसार में हुई एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि दुष्यंत चौटाला के काफिले को एक सफेद बोलेरो वाहन ने रास्ते में रोक लिया। इसी दौरान सिविल ड्रेस में मौजूद इंस्पेक्टर पवन कुमार ने हथियार लहराते हुए उन्हें और उनके सुरक्षाकर्मियों को धमकाया। यह घटना सुरक्षा प्रोटोकॉल और वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दुष्यंत चौटाला ने इसे बेहद गंभीर सुरक्षा चूक बताया है और कहा है कि इस तरह की घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था में चिंताजनक है।

वाई प्लस सुरक्षा के बावजूद सुरक्षा में चूक का दावा
दुष्यंत चौटाला ने हाईकोर्ट को बताया कि वे वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा में आते हैं और इसके बावजूद इस तरह की घटना होना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स ने भी इस पूरे मामले की पुष्टि की है और अलग अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं जिनमें जान से मारने की धमकी का भी उल्लेख है। याचिका में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं रही और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।
पुलिस पर प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और जांच की मांग
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस घटना के बाद हरियाणा पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उनके परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। साथ ही 7 अप्रैल की एक घटना को आधार बनाकर दर्ज एफआईआर को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया गया है। दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट से मांग की है कि पूरे मामले की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी जैसे चंडीगढ़ या पंजाब पुलिस को सौंपी जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि सभी सीसीटीवी फुटेज और संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना न रहे। हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगा।