गोरखपुर में नाबालिग हमले की चार्जशीट से नाम हटाने का आरोप, SSP ने दिए जांच के आदेश

गोरखपुर के गोला क्षेत्र में नाबालिग पर हुए हमले की जांच अब नए विवाद में घिर गई है। पीड़ित की मां ने चार्जशीट से दो आरोपियों के नाम हटाने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद SSP ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
नाबालिग पर हमले के मामले में नया मोड़
गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में नाबालिग रितेश यादव पर हुए हमले के मामले में अब चार्जशीट को लेकर सवाल उठे हैं। पीड़ित की मां पानमती ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर आरोप लगाया है कि मामले में नामजद दो आरोपियों के नाम चार्जशीट से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत में क्षेत्राधिकारी गोला कार्यालय के पेशकार दिनेश सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
13 जून को हुआ था हमला
पानमती के मुताबिक, 13 जून को फल्तेपुर गांव के चौराहे पर उनके नाबालिग बेटे रितेश पर हमला किया गया था। आरोप है कि गुड्डी देवी, आर्यन यादव, आदित्य यादव, धीरज यादव, शुभम यादव, रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव और कौशल यादव ने लोहे की पाइप, रॉड और लाठी-डंडों से उस पर हमला किया।
हमले में रितेश को गंभीर चोटें आई थीं। उसके जबड़े में चोट लगी और सिर में टांके लगाए गए। हालत गंभीर होने पर उसे गोरखपुर से लखनऊ तक इलाज के लिए ले जाना पड़ा।
गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ था केस
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। गंभीर चोट को देखते हुए बाद में धारा 109 BNS भी जोड़ी गई।

मामले में आरोपी धीरज यादव और कौशल यादव की जमानत जिला एवं सत्र न्यायालय, गोरखपुर से 2 जुलाई को खारिज हो चुकी है। इसके बाद विवेचक ने 31 जुलाई को घायल रितेश का उसके घर जाकर बयान दर्ज किया था।
चार्जशीट से दो नाम हटाने का आरोप
पीड़ित की मां का आरोप है कि चार्जशीट तैयार होने के बाद पेशकार दिनेश सिंह घायल रितेश को दोबारा बयान दर्ज कराने के लिए कार्यालय बुला रहे हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि इसका उद्देश्य शुभम यादव और रामप्रवेश उर्फ प्रवेश यादव के नाम चार्जशीट से हटाना है।
पानमती ने यह भी आरोप लगाया कि पेशकार द्वारा मामले की जानकारी क्षेत्राधिकारी को नहीं देने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
परिवार को धमकी देने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोपी पक्ष पर उन्हें और उनके बेटों को धमकी देने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि समझौता नहीं करने पर परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
पानमती ने अपने दोनों बेटों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने SSP से मामले की निष्पक्ष जांच और परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
SSP ने जांच के दिए आदेश
मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ ने जांच के आदेश दिए हैं। अब जांच अधिकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों, चार्जशीट की प्रक्रिया और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल करेंगे।
SSP की ओर से जांच के आदेश दिए जाने के बाद आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी। फिलहाल किसी अधिकारी या आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं।
जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर
चार्जशीट किसी भी आपराधिक मामले की जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में आरोपों के बाद उसकी प्रक्रिया और उसमें शामिल नामों को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, और यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं तो स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए। सबसे अहम बात यह है कि नाबालिग पीड़ित और उसके परिवार को निष्पक्ष जांच तथा कानून के मुताबिक न्याय मिले।
