
पंजाब में 26 मई को होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाएं या ईवीएम से इस पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। मामले पर दोनों पक्षों के बीच लंबी और तीखी बहस देखने को मिली। पंजाब राज्य चुनाव आयोग और भारतीय चुनाव आयोग ने एक दूसरे पर देरी और समन्वय की कमी के आरोप लगाए। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
चुनाव आयोगों के बीच आरोप प्रत्यारोप
सुनवाई के दौरान भारतीय चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि राज्य चुनाव आयोग ने ईवीएम की मांग की थी और मशीनें राजस्थान से भेजी जा रही हैं। आयोग के अनुसार सभी ईवीएम आज रात तक चंडीगढ़ या तय स्थान पर पहुंच जाएंगी। वहीं राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि समय पर मशीनें उपलब्ध न होने के कारण बैलेट पेपर का विकल्प चुना गया। इस मुद्दे पर दोनों आयोगों के बीच गंभीर असहमति देखने को मिली।

कोर्ट में तकनीकी तैयारी पर दावे
याचिकाकर्ता के वकील चेतन मित्तल ने कहा कि चुनाव आयोग ने अदालत में दावा किया है कि ईवीएम एक दिन में तैयार की जा सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मतदान कर्मियों को केवल 15 मिनट की ट्रेनिंग की जरूरत होती है क्योंकि वे पहले भी ईवीएम का उपयोग कर चुके हैं। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस मामले पर अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर है।
पंजाब में चुनावी तैयारी और राजनीतिक आरोप
पंजाब में आठ नगर निगम। 71 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों के चुनाव 26 मई को होने हैं। वोटों की गिनती और परिणाम 29 मई को घोषित किए जाएंगे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहती है और इसी वजह से ईवीएम की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस विवाद ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है और राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है।