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सहारनपुर हंगामे में सांसद इकरा हसन समेत 32 लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में समाजवादी पार्टी की कैराना सांसद Iqra Hasan एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। डीआईजी कार्यालय के बाहर हुए हंगामे और प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने उनके समेत 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद जिले का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। पुलिस ने सात लोगों को नामजद किया है जबकि 25 अज्ञात समर्थकों को भी एफआईआर में शामिल किया गया है। बताया जा रहा है कि सांसद अपने समर्थकों के साथ किसी मामले को लेकर डीआईजी कार्यालय पहुंची थीं जहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए।

सड़क जाम और नारेबाजी से बढ़ी परेशानी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने मुख्य सड़क पर जमकर नारेबाजी की और रास्ता अवरुद्ध कर दिया। इससे इलाके में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन घंटों तक सड़क पर फंसे रहे और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन की वजह से कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई थी और लोगों की आवाजाही भी बाधित हुई।

सहारनपुर हंगामे में सांसद इकरा हसन समेत 32 लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने लगाए गंभीर आरोप

सिविल लाइन चौकी प्रभारी की शिकायत पर सदर बाजार थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान सरकारी कामकाज में बाधा डाली गई और सार्वजनिक रास्ता रोककर निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि अन्य शामिल लोगों की पहचान की जा सके। पुलिस ने साफ कहा है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राजनीतिक माहौल हुआ गर्म

इस एफआईआर के बाद सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिखाई दे रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करना जनता और जनप्रतिनिधियों का अधिकार है। वहीं प्रशासन का पक्ष है कि विरोध प्रदर्शन के नाम पर सड़क जाम करना और लोगों को परेशान करना उचित नहीं कहा जा सकता। अब इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच टकराव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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