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दिल्ली में CNG महंगी, टैक्सी चालकों का बढ़ा गुस्सा; 3 सितंबर को बड़े प्रदर्शन का ऐलान

दिल्ली में CNG के दाम बढ़ने के बाद टैक्सी चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ईंधन खर्च बढ़ने के बावजूद किराया लंबे समय से नहीं बदला है। अब यूनियन ने सरकार को समयसीमा देते हुए 3 सितंबर को बड़े शांतिपूर्ण प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

CNG की कीमत में 3.89 रुपये का इजाफा

दिल्ली में 29 अगस्त से CNG की कीमत 3.89 रुपये प्रति किलो बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलो हो गई है। इससे पहले यही CNG 83.09 रुपये प्रति किलो मिल रही थी। रोजाना कई घंटे सड़क पर रहने वाले टैक्सी चालकों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे ईंधन खर्च पर असर डालती है।

किराया पुराना, खर्च लगातार बढ़ा

टैक्सी चालकों की नाराजगी का बड़ा कारण यह है कि उनके मुताबिक सिटी टैक्सी का किराया करीब 15 साल से नहीं बढ़ाया गया है। इस दौरान CNG के अलावा वाहन बीमा, सर्विसिंग, टायर, स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव की लागत में लगातार वृद्धि हुई है।

हर किलो पर बढ़ा खर्च, कमाई पर असर

चालकों का कहना है कि उनकी कमाई पुराने किराये के हिसाब से ही चल रही है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। CNG की कीमत में करीब चार रुपये प्रति किलो की नई बढ़ोतरी दिनभर वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के लिए महीने के बजट पर बड़ा असर डाल सकती है। यही वजह है कि यूनियन अब किराये में तत्काल संशोधन की मांग कर रही है।

दिल्ली में CNG महंगी, टैक्सी चालकों का बढ़ा गुस्सा; 3 सितंबर को बड़े प्रदर्शन का ऐलान

मई में भी हुआ था आंदोलन

किराया बढ़ाने की मांग को लेकर चालक पहले भी सड़कों पर उतर चुके हैं। चालक शक्ति यूनियन के मुताबिक 21, 22 और 23 मई 2026 को सांकेतिक हड़ताल और आंदोलन किया गया था। इसके बाद 22 मई को स्पेशल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के साथ बैठक भी हुई थी। यूनियन का दावा है कि किराये में संशोधन को लेकर जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिला था।

2 सितंबर तक सरकार को समय

अब CNG की नई कीमत ने पुराने मुद्दे को फिर गर्म कर दिया है। चालक शक्ति यूनियन ने सरकार से 2 सितंबर तक सिटी टैक्सी किराये में उचित बढ़ोतरी करने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि मांग पूरी नहीं हुई तो 3 सितंबर को दिल्ली में बड़ा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा।

यात्रियों पर भी पड़ सकता है असर

टैक्सी चालकों की मांग केवल उनकी आय से जुड़ी नहीं है। यदि किराये में संशोधन होता है तो उसका असर यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर, किराया नहीं बढ़ने पर बढ़ती परिचालन लागत का बोझ चालकों पर बना रहेगा। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह चालकों की बढ़ती लागत और यात्रियों के किराये—दोनों के बीच ऐसा संतुलन बनाए, जिससे दिल्ली का टैक्सी परिवहन भी चलता रहे और आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ भी सीमित रहे।

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