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पंजाब की सियासत में तीन क्षेत्र, तीन अलग तस्वीरें; मालवा, माझा और दोआबा में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच राजनीतिक दलों का फोकस राज्य के तीन प्रमुख क्षेत्रों—मालवा, माझा और दोआबा—पर है। तीनों इलाकों की सामाजिक संरचना और स्थानीय प्राथमिकताएं अलग हैं, इसलिए किसान, नशा, सीमा सुरक्षा, दलित और एनआरआई जैसे मुद्दों का प्रभाव भी अलग रूप में दिख सकता है।

मालवा में किसान और खेती सबसे बड़ा मुद्दा

117 विधानसभा सीटों वाले पंजाब में मालवा सबसे बड़ा क्षेत्र है। यहां 69 विधानसभा सीटें आती हैं। 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने मालवा की 69 में से 66 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को दो और शिरोमणि अकाली दल को एक सीट मिली थी।

आगामी चुनाव में किसानों से जुड़े सवाल अहम रह सकते हैं। खेती की लागत, भूजल का गिरता स्तर, ग्रामीण रोजगार, युवाओं का विदेश जाना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था जैसे विषय चुनावी चर्चा में बने हुए हैं।

माझा में सीमा और नशे का सवाल

माझा में अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन और पठानकोट जिले शामिल हैं और यहां 25 विधानसभा सीटें हैं। पाकिस्तान से लगती सीमा के कारण सीमा सुरक्षा और तस्करी से जुड़े मुद्दों का स्थानीय महत्व है।

नशे की समस्या भी राजनीतिक बहस के केंद्र में है। हाल के महीनों में विभिन्न दलों ने ड्रग्स और सीमा पार तस्करी को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं।

दोआबा में दलित और एनआरआई फैक्टर

जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और शहीद भगत सिंह नगर को मिलाकर दोआबा क्षेत्र बनता है। यहां 23 विधानसभा सीटें हैं। क्षेत्र की सामाजिक संरचना में दलित आबादी और विदेशों में बसे पंजाबियों यानी एनआरआई समुदाय की भूमिका चर्चा में रहती है।

रोजगार, विदेश जाने की प्रवृत्ति, उद्योग, स्थानीय विकास और सामाजिक मुद्दे यहां राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं। राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए दलित मतदाताओं से जुड़े मुद्दे भी दलों की रणनीति का हिस्सा हैं।

पंजाब की सियासत में तीन क्षेत्र, तीन अलग तस्वीरें; मालवा, माझा और दोआबा में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?

2022 के आंकड़े भी बताते हैं अलग समीकरण

तीनों क्षेत्रों के पिछले चुनाव परिणामों में भी अंतर दिखाई देता है। 2022 में AAP का मालवा में प्रदर्शन बहुत मजबूत रहा, जबकि माझा और दोआबा में कांग्रेस सहित अन्य दलों ने भी कई सीटें जीतीं।

इन पुराने आंकड़ों को आगामी चुनाव का परिणाम मानना उचित नहीं होगा। 2027 से पहले राजनीतिक गठबंधन, उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और सरकार के प्रदर्शन पर मतदाताओं की प्रतिक्रिया तस्वीर को बदल सकती है।

2027 से पहले बढ़ रही राजनीतिक गतिविधियां

पंजाब में विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 में होने हैं। चुनाव से पहले दलों ने संगठन और अभियान को तेज किया है। BJP ने 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात कही है, जबकि SAD के साथ संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी जारी हैं।

इसी बीच अमृतपाल सिंह से जुड़ा नया राजनीतिक संगठन भी मालवा और माझा में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इससे राज्य की चुनावी राजनीति में क्षेत्रीय समीकरणों की चर्चा और बढ़ी है।

तीनों क्षेत्रों की अलग जरूरतें बनाएंगी चुनावी बहस

पंजाब का चुनाव केवल राज्यव्यापी मुद्दों से तय नहीं होगा। मालवा में खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, माझा में नशा और सीमा से जुड़े सवाल तथा दोआबा में सामाजिक समीकरण, रोजगार और एनआरआई से जुड़े विषय अलग-अलग महत्व पा सकते हैं। पंजाब की चुनावी तस्वीर को समझने के लिए सिर्फ राज्य स्तर के नारों पर नजर रखना पर्याप्त नहीं होगा। असली राजनीतिक बहस इन तीन क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों, सामाजिक समीकरणों और मतदाताओं के अनुभवों के बीच आकार लेगी।

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