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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में भर्ती-खरीद को लेकर विवाद, प्रगट सिंह ने पारदर्शी जांच की मांग की

पंजाब की बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज में कथित भर्ती और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रगट सिंह ने कुलपति से कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने भर्ती, उपकरण खरीद और फार्मेसी परीक्षा से जुड़े सवाल भी उठाएमुलाकात ।

कुलपति से मिले प्रगट सिंह

पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता प्रगट सिंह शुक्रवार को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति डॉ. राजेंद्र कुमार बंसल से मिलने पहुंचे। मुलाकात के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में सामने आए कथित भर्ती और वित्तीय अनियमितताओं की पारदर्शी जांच कराने की मांग रखी।

विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2026 में विभिन्न पदों पर भर्ती और परीक्षाओं से संबंधित कई अधिसूचनाएं दर्ज हैं। इनमें फार्मेसी ऑफिसर, स्टाफ नर्स, मेडिकल ऑफिसर और अन्य पदों की भर्ती प्रक्रिया शामिल है।

बिना मंजूरी पदों पर नियुक्ति का आरोप

कुलपति से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रगट सिंह ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में कुछ ऐसे पदों पर नियुक्तियां की गईं, जिनके लिए विभागीय स्वीकृति नहीं थी।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नियुक्तियों पर करीब सवा लाख रुपये तक खर्च किए जाने की बात सामने आई है। प्रगट सिंह ने कहा कि मामला विद्यार्थियों के भविष्य और सार्वजनिक धन से जुड़ा है, इसलिए इसकी जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।

इन आरोपों पर विश्वविद्यालय की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया या जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में भर्ती-खरीद को लेकर विवाद, प्रगट सिंह ने पारदर्शी जांच की मांग की

उपकरण और ICU बेड की खरीद पर सवाल

प्रगट सिंह ने चिकित्सा उपकरणों और ICU बेड की कथित रूप से ऊंची कीमतों पर खरीद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने मांग की कि यदि खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। अगस्त 2026 में मीडिया रिपोर्टों में 200 से अधिक नए कर्मचारियों के निलंबन और नियुक्तियों की समीक्षा के लिए समिति गठित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। कथित तौर पर कुछ नियुक्तियों में पदों की मंजूरी और बजट संबंधी स्वीकृति पर सवाल उठे थे।

फार्मेसी भर्ती परीक्षा पर भी उठे सवाल

कांग्रेस नेता ने फार्मेसी भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित नकल और पेपर लीक विवाद का मुद्दा भी उठाया। बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से संबंधित 454 फार्मासिस्ट यानी फार्मेसी ऑफिसर पदों की भर्ती प्रक्रिया पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त में अगली सुनवाई तक रोक लगाई थी। याचिका में 19 जुलाई 2026 की लिखित परीक्षा को चुनौती देते हुए परीक्षा में कथित संगठित नकल की बात कही गई थी।

विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी 19 जुलाई को हुई फार्मेसी ऑफिसर परीक्षा से संबंधित प्रश्नपत्र और आंसर-की पर आपत्ति दर्ज कराने का नोटिस उपलब्ध है।

‘जांच पर राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए’

प्रगट सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी व्यक्ति या सरकार की निजी संपत्ति नहीं है। उनके मुताबिक, पुलिस या विजिलेंस जैसी एजेंसियां यदि मामले की जांच करती हैं तो जांच निष्पक्ष और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए।

उन्होंने पंजाब में नशे और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।

जांच के निष्कर्ष पर रहेगी नजर

बाबा फरीद यूनिवर्सिटी में भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से ही कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठे हैं। ऐसे में प्रगट सिंह की मांग के बाद मामले पर निगरानी और बढ़ सकती है।

फिलहाल सबसे अहम यह है कि कथित अनियमितताओं की जांच किस एजेंसी से होती है, क्या दस्तावेज सामने आते हैं और जांच के बाद विश्वविद्यालय या संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

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