हरियाणा में OBC छात्रवृत्ति के आंकड़ों पर सवाल, 52 हजार आवेदन मंजूर फिर भी भुगतान शून्य क्यों?

हरियाणा विधानसभा में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से जुड़े सरकारी आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है। 2024-25 में हजारों OBC आवेदन मंजूर हुए, लेकिन छात्रवार रिकॉर्ड में भुगतान शून्य बताया गया। दूसरी ओर वित्तीय विवरण में करोड़ों रुपये वितरित होने का दावा है।
विधानसभा के जवाब में सामने आया अंतर
कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने सरकार से 2019 से अब तक SC, OBC और EWS विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का वर्षवार विवरण मांगा था। जवाब में 2024-25 के आंकड़ों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा। इस वर्ष OBC विद्यार्थियों के 63,893 आवेदन प्राप्त हुए और 52,023 स्वीकृत किए गए।
छात्रवार रिकॉर्ड में भुगतान शून्य
सरकारी जवाब में छात्रवार विवरण के तहत 2024-25 में छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या शून्य दर्ज है। लेकिन इसी वर्ष के वित्तीय विवरण में OBC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 776.04 लाख रुपये का बजट स्वीकृत होने और 3.44 करोड़ रुपये वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है।
यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब छात्रवार रिकॉर्ड में भुगतान शून्य है, तो 3.44 करोड़ रुपये किस अवधि या किन विद्यार्थियों को दिए गए?

पिछले वर्षों में भी दिखी भुगतान की कमी
2023-24 में 60,696 OBC विद्यार्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें 50,910 आवेदन स्वीकृत हुए। हालांकि भुगतान केवल 17,937 विद्यार्थियों को हुआ। वर्ष 2022-23 में 39,745 आवेदन स्वीकृत हुए और 38,483 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया।
सरकार ने भुगतान में देरी या कमी के पीछे आधार निष्क्रिय होने, सत्यापन संबंधी समस्याओं, अधूरे दस्तावेज और बजट की अनुपलब्धता जैसे कारण बताए हैं।
2025-26 में भुगतान की स्थिति बेहतर
2025-26 में 38,333 OBC आवेदन प्राप्त हुए। इनमें 29,784 मंजूर हुए और 25,847 विद्यार्थियों को भुगतान किया गया। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इस वर्ष स्वीकृत आवेदनों के मुकाबले भुगतान की स्थिति पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बेहतर रही।
BCA विद्यार्थियों के वजीफे का अलग रिकॉर्ड
नूंह विधायक चौधरी आफताब अहमद के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा विभाग ने बताया कि 2025-26 में कक्षा 10वीं के 38,364 और कक्षा 12वीं के 37,257 BCA विद्यार्थियों को मासिक वजीफा मिला। कुल संख्या 75,621 रही। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह योजना OBC पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से अलग है।
EWS छात्रवृत्ति पर भी बड़ा सवाल
EWS विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का रिकॉर्ड भी ध्यान खींचता है। सरकार के अनुसार 2019-20 से 2026-27 तक लगातार आठ वित्तीय वर्षों में इस मद में न बजट स्वीकृत हुआ और न राशि वितरित की गई।
इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम जरूरत रिकॉर्ड की पारदर्शिता और स्पष्ट मिलान की है। छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं में आवेदन, स्वीकृति और वास्तविक भुगतान का आंकड़ा एक-दूसरे से साफ तौर पर जुड़ा होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों और उनके परिवारों को यह समझने में कोई संदेह न रहे कि सरकारी राशि आखिर किसे और कब मिली।