पंजाब के पास ‘फालतू पानी’ नहीं, एक बूंद भी दूसरे राज्य को नहीं देंगे: भगवंत मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुक्रवार को राज्य के जल संसाधनों को लेकर सरकार का रुख दोहराया। लुधियाना में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के किसान मेले में उन्होंने कहा कि पंजाब के पास दूसरे राज्यों के साथ बांटने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और हर बूंद का हिसाब रखा जाएगा।
किसान मेले में पानी के मुद्दे पर बोले मान
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में 18 और 19 सितंबर को दो दिवसीय किसान मेला आयोजित किया गया है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसका उद्घाटन किया। मेले में किसानों के लिए नई फसल किस्मों, बीज, कृषि तकनीक और वैज्ञानिक खेती से जुड़ी जानकारियां प्रदर्शित की जा रही हैं।
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने पंजाब के जल संसाधनों को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि राज्य के पास किसी दूसरे राज्य के साथ साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है।
‘एक बूंद भी बांटने का सवाल नहीं’
मान ने कहा कि पंजाब के पानी का पूरा हिसाब रखा जाएगा और नियमों के अनुसार ही पानी के बंटवारे की बात होगी। उन्होंने पिछली सरकारों पर पानी के मामले में राज्य के हितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।
मुख्यमंत्री का यह बयान पंजाब और हरियाणा के बीच लंबे समय से चले आ रहे सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। पंजाब का रुख रहा है कि उसके पास दूसरे राज्य को देने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है।

SYL नहर विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
SYL नहर का मुद्दा पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों से विवाद का विषय रहा है। हरियाणा अपने हिस्से के नदी जल को नहर के जरिए हासिल करने की मांग करता रहा है, जबकि पंजाब पानी की उपलब्धता और अपने जल संसाधनों पर दबाव का मुद्दा उठाता रहा है।
ऐसे में मुख्यमंत्री का किसान मेले में दिया गया बयान इस पुराने विवाद पर पंजाब सरकार की मौजूदा स्थिति को दोहराता है।
नहर के पानी का इस्तेमाल 88 प्रतिशत तक पहुंचा
भगवंत मान ने कृषि सिंचाई में नहर के पानी के इस्तेमाल को लेकर सरकार के प्रयासों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, नहर सिंचाई में पानी के उपयोग की हिस्सेदारी बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने बताया कि करीब 14,000 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन बिछाई गई है। सरकार के अनुसार, इससे कई इलाकों में भूजल स्तर में सुधार हुआ है।
हालांकि, राज्य के भूजल संकट की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है। सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 153 आकलन इकाइयों में 110 अभी भी ‘ओवर-एक्सप्लॉइटेड’ श्रेणी में हैं।
किसानों के लिए दिन में बिजली और नई तकनीक
मुख्यमंत्री ने किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। किसान मेले में वैज्ञानिक खेती, नई फसल किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मान ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के आधार पर खेती करने और प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करने की अपील भी की। किसान मेले में किसानों को आगामी रबी सीजन के लिए नई किस्मों और कृषि संबंधी तकनीकों की जानकारी दी जा रही है।
पानी की राजनीति के बीच बड़ा सवाल
पंजाब के सामने एक तरफ सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर भूजल पर बढ़ता दबाव भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में नहर सिंचाई का विस्तार और जल संरक्षण आने वाले समय में राज्य की कृषि नीति के महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।
भगवंत मान का बयान फिलहाल पंजाब सरकार के उस रुख को स्पष्ट करता है कि राज्य अपने जल संसाधनों को लेकर उपलब्धता और नियमों के आधार पर ही फैसला करेगा। SYL और अंतरराज्यीय जल बंटवारे का मुद्दा आगे भी पंजाब की राजनीति और कृषि व्यवस्था में अहम बना रहेगा।