10वीं पास पूजा सैनी बनीं ‘मशरूम लेडी’, दो बैग से शुरू किया कारोबार, आज लाखों की सालाना बचत

उत्तर प्रदेश के मुर्तजापुर की पूजा सैनी ने घर से शुरू किए छोटे से मशरूम कारोबार को मेहनत और प्रशिक्षण के दम पर बड़े स्वरोजगार में बदल दिया। कभी सिर्फ दो बैग से शुरुआत करने वाली पूजा आज हजारों बैग में मशरूम उगाकर परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं।
शादी के बाद शुरू किया मशरूम उत्पादन
बेहट क्षेत्र के मुर्तजापुर गांव की पूजा सैनी महिलाओं के लिए स्वरोजगार की मिसाल बन रही हैं। 10वीं तक पढ़ाई करने वाली पूजा ने शादी के करीब तीन महीने बाद पति के साथ मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेने के बाद वर्ष 2018 में घर पर ही मशरूम उत्पादन शुरू किया। शुरुआत प्रयोग के तौर पर सिर्फ दो बैग से हुई। उत्पादन अच्छा रहा तो पूजा ने धीरे-धीरे काम का विस्तार करना शुरू कर दिया।
दो बैग से हजारों बैग तक पहुंचा कारोबार
पूजा के मुताबिक शुरुआत में उन्होंने छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन की तकनीक को समझा। अनुभव बढ़ने के साथ बैग की संख्या भी बढ़ती गई। आज वह एक समय में करीब 5 से 6 हजार बैग में मशरूम तैयार कर रही हैं।
मशरूम उत्पादन के लिए भूसे का इस्तेमाल किया जाता है। एक बैग तैयार करने में लगभग 60 से 120 रुपये तक का खर्च आता है। इस तरह घर से शुरू हुआ छोटा प्रयोग धीरे-धीरे नियमित कारोबार का रूप ले चुका है।

एक बैग से 3 से 5 किलो तक उत्पादन
पूजा के अनुसार, एक बैग से लगभग 3 से 5 किलो तक मशरूम का उत्पादन हो सकता है। बैग तैयार होने के करीब 15 से 20 दिन बाद मशरूम निकलना शुरू हो जाती है और करीब तीन से चार महीने तक उत्पादन मिलता रहता है।
वह अलग-अलग मौसम और मांग के अनुसार कई किस्मों की मशरूम तैयार करती हैं। इससे कारोबार को पूरे साल बनाए रखने में मदद मिलती है।
मिल्की से लेकर बटन मशरूम तक उत्पादन
पूजा के यहां मिल्की, ओयस्टर, बटन, ढींगरी और पोर्टोबेलो जैसी मशरूम की किस्मों का उत्पादन किया जाता है। उनके मुताबिक बाजार में मशरूम की कीमत करीब 200 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है।
विभिन्न किस्मों और बाजार की मांग के अनुसार कीमत में बदलाव हो सकता है। उत्पादन और बिक्री के बीच बेहतर तालमेल बनाकर पूजा ने अपने कारोबार को आगे बढ़ाया है।
दिल्ली और देहरादून तक पहुंची उपज
पूजा सैनी के घर पर तैयार होने वाली मशरूम अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। उनकी उपज की सप्लाई दिल्ली और देहरादून तक हो रही है।
पूजा का कहना है कि उनकी मशरूम की मांग कई बार इतनी अधिक हो जाती है कि वह पूरी डिमांड पूरी नहीं कर पातीं। बाजार तक पहुंच बनने के साथ उनके कारोबार का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
सालाना 15 से 20 लाख रुपये की बचत का दावा
पूजा के मुताबिक, मशरूम उत्पादन से उन्हें सालाना करीब 15 से 20 लाख रुपये की बचत हो रही है। यह आंकड़ा उनकी ओर से बताया गया है और इसे शुद्ध लाभ के रूप में समझने से पहले उत्पादन लागत, श्रम, परिवहन और अन्य खर्चों को ध्यान में रखना जरूरी है।
पूजा के पति भी इस काम में उनका सहयोग करते हैं। उनका कहना है कि घर से ही काम करते हुए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में योगदान देना उनके लिए संतोष की बात है।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
पूजा सैनी की कहानी बताती है कि स्वरोजगार के लिए हमेशा बड़े निवेश या बड़े कारोबार की जरूरत नहीं होती। सही प्रशिक्षण, लगातार मेहनत और बाजार की समझ के साथ छोटे स्तर से भी काम शुरू किया जा सकता है।
दो बैग से शुरुआत कर हजारों बैग तक पहुंची पूजा की यात्रा ग्रामीण महिलाओं के लिए कृषि आधारित उद्यमिता का उदाहरण बन रही है।