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बख्तियारपुर के बाद नालंदा का नाम बदलने की मांग, मदन सहनी बोले- नीतीश के नाम पर रखना खुशी की बात

बिहार में बख्तियारपुर का नाम बदलकर ‘नीतीशपुर’ करने की मांग पर सियासत लगातार गर्म हो रही है। अब JDU के मंत्री मदन सहनी ने इस मांग का समर्थन करते हुए नालंदा का नाम भी पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम पर रखने का सुझाव दिया है। उनके बयान ने नाम बदलने की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।

मदन सहनी ने किया मांग का समर्थन

गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को मीडिया से बातचीत में मदन सहनी ने कहा कि बिहार के विकास और सामाजिक बदलाव में नीतीश कुमार के योगदान को देखते हुए उनके नाम पर किसी स्थान का नाम रखा जाना खुशी की बात होगी।

उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें बख्तियारपुर का नाम ‘नीतीशपुर’ करने की बात कही गई थी।

बोले- सिर्फ बख्तियारपुर ही क्यों?

मदन सहनी ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर नीतीश कुमार के नाम पर किसी स्थान का नामकरण करना है तो केवल बख्तियारपुर तक इसे सीमित क्यों रखा जाए। उन्होंने कहा कि अगर नालंदा का नाम भी नीतीश कुमार के नाम पर रखा जाता है तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी।

बख्तियारपुर के बाद नालंदा का नाम बदलने की मांग, मदन सहनी बोले- नीतीश के नाम पर रखना खुशी की बात

इस बयान के साथ अब बहस केवल बख्तियारपुर के नाम को लेकर नहीं रह गई है। नालंदा का नाम बदलने का सुझाव भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।

विकास और सामाजिक बदलाव का हवाला

मदन सहनी ने नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक कार्यकाल का जिक्र करते हुए बिहार के विकास में उनके योगदान को रेखांकित किया। JDU नेताओं की ओर से लगातार यह तर्क दिया जा रहा है कि राज्य में हुए विकास और सामाजिक बदलाव में नीतीश कुमार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

हालांकि, किसी ऐतिहासिक या भौगोलिक स्थान का नाम बदलना सिर्फ राजनीतिक भावना का विषय नहीं होता। इससे जुड़ी ऐतिहासिक पहचान और स्थानीय भावनाएं भी महत्वपूर्ण होती हैं।

शराबबंदी को बताया सामाजिक बदलाव

मदन सहनी ने बातचीत के दौरान बिहार की शराबबंदी नीति का भी समर्थन किया। उन्होंने इसे सामाजिक हित से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि शराब की लत को समाज से दूर करने के लिए यह फैसला लिया गया था।

उनके मुताबिक, शराबबंदी से कई परिवारों में शांति आई और सामाजिक बदलाव को बढ़ावा मिला। उन्होंने साफ किया कि सरकार इस कानून को जारी रखने के पक्ष में है।

महिलाओं और गरीबों के हित का दावा

मंत्री ने शराबबंदी को महिलाओं, गरीबों और समाज के दूसरे वर्गों के हित से भी जोड़ा। उनका कहना था कि सरकार कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने शराबबंदी के कारण कार्रवाई का सामना करने वाली महिलाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, इस नीति को लेकर बिहार में लंबे समय से समर्थन और विरोध दोनों तरह के तर्क सामने आते रहे हैं।

नामकरण की राजनीति अब कितनी आगे जाएगी?

बख्तियारपुर से शुरू हुई ‘नीतीशपुर’ की मांग और अब नालंदा का नाम बदलने के सुझाव ने बिहार की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है। क्या ये मांगें केवल राजनीतिक सम्मान की अभिव्यक्ति हैं या भविष्य में इनके लिए औपचारिक पहल भी होगी? फिलहाल इतना साफ है कि नीतीश कुमार के नाम और विरासत को लेकर JDU के भीतर चर्चा तेज हो चुकी है।

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