
पद्मश्री से सम्मानित मशहूर शायर Bashir Badr अब हमारे बीच नहीं रहे। गुरुवार दोपहर उन्होंने भोपाल स्थित अपने ईदगाह हिल्स वाले घर में अंतिम सांस ली। 91 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर सामने आते ही साहित्य और उर्दू शायरी की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उम्र संबंधी कई समस्याओं से जूझ रहे थे। परिवार के करीबी लोगों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनके निधन की खबर के बाद देशभर के साहित्य प्रेमी. शायर और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। बशीर बद्र सिर्फ एक शायर नहीं थे बल्कि उर्दू अदब की ऐसी आवाज थे जिन्होंने मोहब्बत. रिश्तों और इंसानी एहसास को बेहद आसान और दिल छू लेने वाले शब्दों में दुनिया के सामने रखा। उनके जाने से उर्दू साहित्य की एक बड़ी पहचान हमेशा के लिए खो गई है।
मोहब्बत और तन्हाई को अल्फाज देने वाले शायर थे बशीर बद्र
Bashir Badr का असली नाम सैयद मोहम्मद बशीर था और उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को हुआ था। भोपाल से उनका गहरा रिश्ता रहा और उन्होंने अपनी शायरी के जरिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई। बशीर बद्र की गज़लों की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी और गहराई थी। वह बेहद आसान शब्दों में ऐसी बातें कह जाते थे जो सीधे दिल में उतर जाती थीं। मोहब्बत. तन्हाई. यादें और रिश्तों पर लिखी उनकी शायरियां आज भी लोगों की जुबान पर रहती हैं। मुशायरों में जब भी उनका नाम लिया जाता था तो लोग उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते थे। उनकी आवाज और अंदाज दोनों ही बेहद अलग थे। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि बशीर बद्र ने उर्दू शायरी को नई पहचान देने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी गज़लों ने कई पीढ़ियों को प्रभावित किया और आज भी उनकी पंक्तियां सोशल मीडिया से लेकर मुशायरों तक में गूंजती हैं।

डिमेंशिया से जूझ रहे थे बशीर बद्र. याददाश्त भी चली गई थी
पिछले लंबे समय से Bashir Badr डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। बताया जाता है कि उनकी याददाश्त लगभग खत्म हो चुकी थी और वह लोगों को पहचान भी नहीं पा रहे थे। उम्र बढ़ने के साथ उनकी सेहत लगातार कमजोर होती गई। परिवार के सदस्य और करीबी लोग उनकी देखभाल में जुटे हुए थे। हालांकि उनकी शारीरिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार गुरुवार शाम को किया जा सकता है हालांकि अंतिम समय को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने भावुक संदेश साझा किए। कई साहित्यकारों और कलाकारों ने कहा कि बशीर बद्र का जाना उर्दू साहित्य के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी लिखी पंक्तियां आने वाले कई दशकों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।
जावेद अख्तर ने कहा. “आज उर्दू थोड़ी गरीब हो गई”
मशहूर गीतकार और शायर Javed Akhtar ने Bashir Badr के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि आज उर्दू थोड़ी गरीब हो गई है क्योंकि बेहद मधुर और संवेदनशील कवि हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गए। जावेद अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र की गज़लें हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगी। बशीर बद्र की कई मशहूर गज़लें आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखती हैं। “न जी भर के देखा न कुछ बात की”. “आंखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा”. “अगर तलाश करूं कोई मिल ही जाएगा” और “सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा” जैसी पंक्तियां आज भी मुशायरों और साहित्यिक मंचों पर बार बार सुनाई देती हैं। उनके अल्फाजों ने मोहब्बत को नई भाषा दी और दर्द को नई पहचान। बशीर बद्र के जाने के बाद उर्दू शायरी का एक सुनहरा दौर जैसे हमेशा के लिए थम गया है।