
उत्तराखंड के रुद्रपुर में बारावफात के दौरान कथित विवादित और भड़काऊ बयान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। त्रिशूल चौक पर दी गई तकरीर के वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी साफ कहा है कि प्रदेश में सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अवैध मदरसों की कार्रवाई को लेकर बयान
मामला 26 अगस्त का बताया जा रहा है। आरोप है कि मुफ़्ती मुजीब ने तकरीर के दौरान उत्तराखंड सरकार की अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई का विरोध करते हुए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उनके कथित बयान को सरकार के लिए चुनौती के तौर पर देखा गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया का वीडियो भी चर्चा में आया।
हालांकि, किसी बयान को उसके पूरे संदर्भ और जांच के आधार पर ही अंतिम रूप से समझना जरूरी है।
मुख्यमंत्री धामी ने जताई सख्त नाराजगी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में नफरत और सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ने वाली बातों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी और ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएम ने यह भी कहा कि राज्य में कानून का राज कायम है और प्रशासन बयान देने वाले व्यक्ति की तलाश कर रहा है। उनका संदेश स्पष्ट था कि किसी भी समुदाय या व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।

पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
रुद्रपुर के सीओ के मुताबिक, बारावफात जुलूस के दौरान त्रिशूल चौक पर एक मुफ़्ती द्वारा कथित तौर पर अनर्गल बयान दिए गए और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में तत्काल संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अब जांच के दौरान वीडियो, बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मेयर ने भी दी कड़ी चेतावनी
रुद्रपुर के मेयर विकास शर्मा ने भी कथित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को देवभूमि में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मेयर ने सरकार की कार्रवाई को लेकर भी सख्त रुख जाहिर किया।
इस बीच मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा मुद्दा बन गया है।
मुफ़्ती मुजीब ने दी अपनी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद मुफ़्ती मुजीब की ओर से सफाई भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उनका दावा है कि उनका उद्देश्य सरकार को धमकी देना नहीं था, बल्कि अपनी बात अनुरोध के तौर पर रखना था।
अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित बयान का वास्तविक संदर्भ क्या था और उसमें कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं। संवेदनशील मामलों में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी है। उत्तराखंड में शांति और सामाजिक विश्वास बनाए रखना प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।