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डॉक्टर की कुर्सी पर बैठा ड्राइवर, मरीजों को लिखी दवा? कानपुर के कांशीराम अस्पताल का वीडियो वायरल

कानपुर के कांशीराम ट्रॉमा सेंटर से सामने आए वायरल वीडियो ने अस्पताल की व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक व्यक्ति डॉक्टर की कुर्सी पर बैठकर मरीजों से बीमारी पूछता और दवा की पर्ची लिखता दिखाई दे रहा है। मामले की जांच शुरू हो गई है।

वायरल वीडियो ने मचाई हलचल

रामादेवी स्थित कांशीराम अस्पताल का बताया जा रहा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। वीडियो में नजर आ रहा व्यक्ति ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी पर बैठा दिखाई देता है।

वह मरीजों से बातचीत करता है और कथित तौर पर दवा की पर्ची भी लिखता नजर आ रहा है। वीडियो की वजह से सबसे बड़ा सवाल मरीजों के इलाज की प्रक्रिया और उनकी सुरक्षा को लेकर उठा है।

डॉक्टर कोर्ट गए थे, ड्राइवर पर लगा आरोप

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, संबंधित डॉक्टर डॉ. रामकेश घटना के समय कोर्ट में एविडेंस के लिए गए थे। वीडियो में दिखाई दे रहे युवक के बारे में डॉक्टर ने उसे अपना ड्राइवर बताया है।

हालांकि, वायरल वीडियो में व्यक्ति द्वारा मरीजों से बातचीत और दवा लिखे जाने का दावा सामने आया है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि उसने वास्तव में चिकित्सकीय परामर्श दिया था या वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि का पूरा संदर्भ कुछ और था।

डॉक्टर की कुर्सी पर बैठा ड्राइवर, मरीजों को लिखी दवा? कानपुर के कांशीराम अस्पताल का वीडियो वायरल

CMS ने मांगा स्पष्टीकरण

कांशीराम अस्पताल के CMS डॉ. पीयूष मिश्रा के मुताबिक, वीडियो 14 सितंबर की शाम उनके संज्ञान में आया। इसके बाद 15 सितंबर की सुबह अस्पताल में जांच कराई गई।

जांच के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति मौके पर नहीं मिला। इसके बाद डॉ. रामकेश से पूछताछ की गई और पूरे घटनाक्रम को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया।

भविष्य में कार्रवाई की चेतावनी

अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित डॉक्टर से जवाब मांगा है। CMS ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर FIR दर्ज कराने और शासन को रिपोर्ट भेजने की बात भी कही गई है। फिलहाल प्रशासन का ध्यान वायरल वीडियो की वास्तविकता और पूरे घटनाक्रम की जांच पर है।

जांच से खुलेंगे कई अहम सवाल

मामले में अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं। यदि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति वास्तव में डॉक्टर नहीं था, तो वह ओपीडी में किस अनुमति से मौजूद था? क्या उसने मरीजों को चिकित्सकीय सलाह दी? क्या लिखी गई पर्चियों की जांच की जाएगी?

इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मामले में अस्पताल प्रशासन के लिए यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ओपीडी में डॉक्टर की अनुपस्थिति के दौरान मरीजों की देखरेख के लिए निर्धारित व्यवस्था क्या थी।

निष्कर्ष: वायरल वीडियो ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और मरीजों के इलाज से जुड़ी जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

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